Tuesday, July 28, 2026
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E20 फ्यूल पर केजरीवाल का बड़ा दांव, दिल्ली में होगा AAP का नेशनल टाउनहॉल सरकार से सीधा संवाद या नई सियासी जंग

नई दिल्ली:नीट विवाद और छात्र आंदोलन के बाद अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपना अगला बड़ा अभियान E20 फ्यूल नीति के खिलाफ शुरू कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि 1 अगस्त (शनिवार) को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में “नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20” का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, पर्यावरण विशेषज्ञों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाकर E20 पेट्रोल से जुड़े अनुभवों और सुझावों पर चर्चा की जाएगी।

केजरीवाल ने देशभर के लोगों से इस अभियान में जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर के लोग कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं, जबकि अन्य राज्यों के नागरिक ऑनलाइन अपनी राय और सुझाव दे सकेंगे। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम लोगों की आवाज़ सरकार तक पहुँचाने की पहल बताया।

E20 पर क्यों बढ़ा विवाद?

E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर पिछले कुछ समय से देशभर में बहस जारी है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि कई वाहन मालिकों ने ईंधन की माइलेज कम होने, इंजन के प्रदर्शन पर असर और रखरखाव की लागत बढ़ने जैसी शिकायतें की हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर पार्टी लगातार लोगों से फीडबैक जुटा रही है और अब उन्हें एक राष्ट्रीय मंच पर लाने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार और कई ऑटोमोबाइल कंपनियाँ पहले इन चिंताओं को खारिज कर चुकी हैं और E20 को ऊर्जा सुरक्षा तथा एथेनॉल मिश्रण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही हैं।

सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी

केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह युवाओं की आवाज़ ने शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ी थी, उसी तरह अब E20 के मुद्दे पर भी देशभर के लोगों को एकजुट होना होगा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिल रहा है और ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से जुटाए गए दो लाख से अधिक ज्ञापनों को प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।

टाउनहॉल में क्या होगा खास?

AAP के अनुसार, टाउनहॉल में नागरिक अपने अनुभव साझा करेंगे, विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करेंगे और E20 नीति से जुड़े सुझावों पर खुलकर विचार-विमर्श होगा। पार्टी का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए सरकार के सामने उपभोक्ताओं की वास्तविक चिंताओं को रखा जाएगा और ईंधन नीति में आवश्यक बदलाव की मांग की जाएगी।

क्या बनेगा नया राष्ट्रीय मुद्दा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि E20 फ्यूल को लेकर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। यदि इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिलता है, तो यह केवल ईंधन नीति का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि उपभोक्ता अधिकार, वाहन सुरक्षा और सरकारी नीतियों पर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस का विषय भी बन सकता है। फिलहाल, सभी की नजर 1 अगस्त को होने वाले AAP के नेशनल टाउनहॉल पर है, जहां से इस मुद्दे की आगे की दिशा तय हो सकती है।

कुर्सी नहीं, कांटों का ताज नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने 25 लाख छात्रों का भरोसा लौटाने की सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली:देश में नीट-यूजी परीक्षा विवाद, पेपर लीक और छात्रों के ऐतिहासिक आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव हुआ है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल ली है। हालांकि, यह नई जिम्मेदारी किसी सम्मान से कम और चुनौतियों से भरे “कांटों के ताज” जैसी मानी जा रही है। देशभर के 25 लाख से अधिक अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की निगाहें अब नए शिक्षा मंत्री पर टिकी हैं कि क्या वे शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल कर पाएंगे।नीट-यूजी पेपर लीक विवाद ने केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। लाखों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग की। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला लंबा आंदोलन और देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा और शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन किया गया।

सबसे बड़ी चुनौती—NTA की खोई साख वापस लाना

नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करना है। पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन में हुई कथित लापरवाही के बाद छात्रों का भरोसा बुरी तरह डगमगा गया है। अब उम्मीद की जा रही है कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

पेपर लीक माफिया पर निर्णायक कार्रवाई

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा रद्द करना या अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। नए शिक्षा मंत्री को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए मजबूत कानून, तेज जांच और फास्ट-ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया की मांग लगातार उठ रही है।

25 लाख छात्रों का टूटा भरोसा लौटाना आसान नहीं

नीट विवाद के दौरान लाखों छात्र मानसिक तनाव, अनिश्चितता और भविष्य को लेकर चिंता में रहे। कई परीक्षाएं विवादों में घिरीं और अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ा। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा जीतने की चुनौती भी है।

नई शिक्षा नीति और छात्रों की मानसिक सेहत पर भी रहेगा फोकस

प्रह्लाद जोशी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन को भी आगे बढ़ाना होगा। इसके साथ ही कोचिंग संस्कृति, परीक्षा का बढ़ता दबाव, छात्रों में मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं पर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत होगी। शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से छात्र-केंद्रित सुधारों की मांग कर रहे हैं।

टेक्नोलॉजी आधारित परीक्षा प्रणाली की उम्मीद

सरकार पहले ही परीक्षा सुधारों के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। अब उम्मीद है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुरक्षा, एआई आधारित निगरानी और मजबूत साइबर सुरक्षा के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

आसान नहीं होगा यह सफर

प्रह्लाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं जब देश का युवा वर्ग जवाब चाहता है। छात्रों की मांग केवल नई परीक्षाएं कराने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें मेहनत करने वाले हर अभ्यर्थी को निष्पक्ष अवसर मिल सके। आने वाले महीनों में नए शिक्षा मंत्री के फैसले यह तय करेंगे कि क्या देश के लाखों छात्रों का शिक्षा व्यवस्था पर टूटा हुआ भरोसा फिर से कायम हो पाएगा या नहीं।

26 दिन के ऐतिहासिक अनशन के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, सबसे पहले पहुंचे राजघाट महात्मा गांधी को नमन कर लद्दाख के लिए होंगे रवाना

नई दिल्ली:नीट पेपर लीक मामले को लेकर 26 दिनों तक ऐतिहासिक अनशन करने वाले प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उनकी पहली मंजिल राजघाट रही, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनके अपने गृह राज्य लद्दाख के लिए रवाना होने की जानकारी सामने आई है।

सोनम वांगचुक का यह अनशन देशभर में छात्रों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर सबसे चर्चित आंदोलनों में से एक रहा। उन्होंने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया था। इस दौरान देशभर से छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उनका समर्थन किया। लगातार 26 दिनों तक चले इस आंदोलन ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया और आखिरकार सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद 24 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया।

राजघाट पहुंचकर बापू को किया नमन

अस्पताल से बाहर निकलने के बाद सोनम वांगचुक सीधे राजघाट पहुंचे। यह वही स्थान है जहां उन्होंने अनशन शुरू करने से पहले भी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर अपने आंदोलन की शुरुआत की थी। उनके सहयोगियों के अनुसार, वांगचुक का मानना है कि सत्याग्रह, अहिंसा और लोकतांत्रिक संघर्ष की प्रेरणा उन्हें महात्मा गांधी से मिली है। इसलिए अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने सबसे पहले राजघाट जाकर बापू को नमन किया।

अस्पताल ने स्वास्थ्य को लेकर दी राहतभरी जानकारी

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि सोनम वांगचुक को 21 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने इंटरनल मेडिसिन, क्रिटिकल केयर और अन्य विभागों की संयुक्त निगरानी में उनका इलाज किया। अस्पताल के अनुसार डिस्चार्ज के समय उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर थी, सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक सामान्य पाए गए और उन्हें नियमित मेडिकल फॉलो-अप की सलाह दी गई है।

26 दिन का अनशन बना राष्ट्रीय आंदोलन

सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान भी उन्होंने अपने आंदोलन और छात्रों के मुद्दों को लेकर लगातार संदेश दिए।

सरकार ने मानीं मांगें, खत्म हुआ आंदोलन

सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। इसके बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि देशहित, छात्रों के भविष्य और संभावित तनाव को देखते हुए उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलन की जीत बताया।

CJP का 36 दिन लंबा प्रदर्शन भी हुआ समाप्त

इधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से चल रहा 36 दिनों का प्रदर्शन भी समाप्त हो गया। इस आंदोलन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा,

“यह लोकतंत्र की जीत है—सीधे लोकतंत्र की जीत, जो सड़कों से आई है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen Z को बधाई।”

अब लद्दाख लौटेंगे सोनम वांगचुक

राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सोनम वांगचुक अपने गृह राज्य लद्दाख के लिए रवाना होंगे। माना जा रहा है कि वहां पहुंचकर वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ-साथ शिक्षा, पर्यावरण और युवाओं से जुड़े अभियानों को आगे बढ़ाने की दिशा में नई रणनीति तैयार करेंगे। उनका यह आंदोलन भारतीय लोकतंत्र में शांतिपूर्ण जनआंदोलन और छात्र शक्ति की एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारों से गूंजा संसद परिसर, इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे तो हुआ भव्य स्वागत

नई दिल्ली:शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को जब वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, तो संसद परिसर में उनका अभूतपूर्व स्वागत देखने को मिला। जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान संसद भवन के मुख्य द्वार पर पहुंचे, भाजपा और एनडीए के सांसदों ने “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के गगनभेदी नारों के साथ उनका स्वागत किया। कुछ देर के लिए पूरा संसद परिसर नारों और तालियों की गूंज से भर गया। इस दौरान कई सांसदों ने उनसे हाथ मिलाया, गले लगकर उनका अभिवादन किया और उनका हौसला बढ़ाया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा CJP के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शनों और संसद में विपक्ष के लगातार हमलों के बाद सामने आया। हालांकि इस्तीफे के बावजूद पार्टी के भीतर उनके प्रति समर्थन में कोई कमी नहीं दिखी। संसद में मिला जोरदार स्वागत इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व और सांसदों का भरोसा आज भी धर्मेंद्र प्रधान पर कायम है।

संसद परिसर में मौजूद कई भाजपा सांसदों ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान संगठन और सरकार दोनों के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। उनका योगदान केवल शिक्षा मंत्रालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठन को मजबूत करने और कई राज्यों में पार्टी के विस्तार में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सांसदों का कहना था कि किसी एक पद से हटने का मतलब यह नहीं है कि उनकी राजनीतिक भूमिका समाप्त हो गई है।

संसद पहुंचने के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया के सवालों पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने केवल मुस्कुराकर सभी का अभिवादन स्वीकार किया और सीधे संसद भवन के भीतर चले गए। उनके शांत और संयमित व्यवहार को भी राजनीतिक हलकों में सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने संसद परिसर में हुए इस स्वागत पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि इस्तीफे के बाद इस तरह का शक्ति प्रदर्शन राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। हालांकि भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह स्वागत केवल एक वरिष्ठ नेता के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में धर्मेंद्र प्रधान को मिला समर्थन यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर उनकी स्वीकार्यता अभी भी मजबूत है। ऐसे में आने वाले दिनों में उन्हें संगठन या सरकार में कोई नई और अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के अंदर भी इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि भविष्य में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका क्या होगी।

फिलहाल संसद में उनके स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है। समर्थक इसे धर्मेंद्र प्रधान के प्रति पार्टी के विश्वास और सम्मान का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की एकजुटता का बड़ा संदेश माना जा रहा है। आने वाले दिनों में धर्मेंद्र प्रधान की अगली राजनीतिक भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

प्रधान का प्रस्थान युवाओं की आधी जीत, शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव ही होगी पूरी जीत : वीरेन्द्र सिंह तोमर

रायपुर। क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष भाई वीरेन्द्र सिंह तोमर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने को देशभर में आंदोलनरत युवाओं की “आधी लेकिन महत्वपूर्ण जीत” करार दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की वास्तविक जीत तब मानी जाएगी, जब देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन दिखाई देगा और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी।तोमर ने कहा कि लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने के कारण अनेक छात्रों को मानसिक तनाव और निराशा का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस दौरान जान गंवाने वाले विद्यार्थियों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश के लिए बेहद चिंताजनक हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई सप्ताह से आंदोलन कर रहे युवाओं की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत थीं। उनके अनुसार यह आंदोलन किसी जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार का आंदोलन था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी युवाओं ने पूरे आंदोलन के दौरान संयम और लोकतांत्रिक मर्यादा का परिचय दिया तथा पुलिसकर्मियों के प्रति भी सम्मानजनक व्यवहार किया।

तोमर ने कहा कि कलम देश की सबसे बड़ी शक्ति है। यह केवल भावनाओं को ही नहीं, बल्कि समाज के विचारों को भी जागृत करने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर ध्यान दिया जाता तो लगातार पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने नहीं आतीं।

प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की पंक्तियों—

“हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”

—का उल्लेख करते हुए तोमर ने कहा कि युवाओं ने देश को नई दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम दर्शाता है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ प्रभावी होती है और युवाओं की एकजुटता परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

उन्होंने विश्वास जताया कि देश का युवा अब शिक्षा व्यवस्था सहित अन्य जनहित के मुद्दों पर भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेगा और सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ये लोकतंत्र की जीत है— धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया, CJP और Gen Z को दी बधाई

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र और शांतिपूर्ण जनआंदोलन की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह जीत शांति, धैर्य और दृढ़ता की है तथा इसके लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), देश की युवा पीढ़ी (Gen Z) और उन सभी नागरिकों को बधाई दी, जिन्होंने अपनी आवाज़ बुलंद की।सोनम वांगचुक ने लिखा, “यह लोकतंत्र की जीत है। डायरेक्ट डेमोक्रेसी सड़कों से निकली है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen Z को बधाई। उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज़ उठाई। अब जवाबदेही से सुधार की ओर बढ़ने का समय है।”

छात्र आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री ने दिया इस्तीफा

देशभर में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और आगे भी रहेगी।

NEET विवाद का किया जिक्र

अपने विस्तृत संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी। परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई और अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया।उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को निष्पक्ष और सुचारू रूप से आयोजित करना था, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला।

“किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न होने दिया जाए।उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणामों में गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के कई छात्रों ने सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान कुछ लोगों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिश भी की गई, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।

“युवाओं का भविष्य सर्वोपरि”

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से उनका मन व्यथित हुआ। उन्होंने कहा कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि देश के विद्यार्थी कानूनी और राजनीतिक विवादों में उलझें तथा राष्ट्रविरोधी ताकतें मौजूदा स्थिति का फायदा उठाएं।

इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजने का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार

अपने संदेश के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और सभी सहयोगियों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वह देश, ओडिशा की जनता और युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

NEET पेपर लीक आंदोलन पर आज निर्णायक दिन, सरकार-CJP की तीसरी बैठक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिकीं निगाहें

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच शनिवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार और कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच आज दोपहर 3:30 बजे तीसरी और निर्णायक बैठक होगी। इस बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। सबसे ज्यादा नजरें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार के रुख पर टिकी हैं।बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह सरकार की ओर से शामिल होंगे, जबकि CJP का प्रतिनिधित्व आशुतोष रांका और सौरव दास करेंगे। माना जा रहा है कि इस बातचीत के बाद आंदोलन की आगे की दिशा तय हो सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर फैसला आज संभव

CJP का कहना है कि सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर निर्णय लेने के लिए शनिवार तक का समय मांगा था। संगठन का दावा है कि यदि इस मुद्दे पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा तथा संसद तक बड़े मार्च का आयोजन किया जाएगा।

मुआवजे और FIR वापस लेने पर सकारात्मक संकेत

शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच करीब दो घंटे तक चली बैठक के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार छात्रों के प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखा रही है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के मुद्दे पर भी सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। हालांकि तीसरी प्रमुख मांग, यानी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर अंतिम निर्णय आज की बैठक में सामने आ सकता है।

दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, कई मेट्रो स्टेशन बंद

संभावित विरोध-प्रदर्शन और बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की आशंका को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने का फैसला किया है।राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट जैसे प्रमुख स्टेशनों पर केवल इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जबकि जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद रहेगा। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की सेवाओं में भी आंशिक बदलाव किया गया है।

आज की बैठक पर टिकी आंदोलन की दिशा

NEET पेपर लीक को लेकर पिछले कई दिनों से राजधानी में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। ऐसे में सरकार और CJP के बीच होने वाली यह तीसरी बैठक आंदोलन के भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो गतिरोध समाप्त हो सकता है, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में संसद मार्च सहित बड़े आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पोलियो से जंग, गरीबी से संघर्ष और फिर इतिहास… बिहार के झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला पदक

ग्लासगो/पटना। कभी परिवार का पेट भरने के लिए सब्जियां बेचीं, कभी रोजी-रोटी के लिए ई-रिक्शा चलाया और बचपन में पोलियो जैसी गंभीर चुनौती का सामना किया। लेकिन हौसलों की उड़ान इतनी ऊंची थी कि तमाम मुश्किलें भी उनके कदम नहीं रोक सकीं। बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का पदक खाता खोल दिया और अपने संघर्ष को सफलता की नई मिसाल में बदल दिया।स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन झंडू कुमार ने पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह भारत का इन खेलों में पहला पदक है, जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया।

181 और 190 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाकर जीता ब्रॉन्ज

झंडू कुमार ने प्रतियोगिता में 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और कुल 130.9 अंक हासिल किए। अंतिम प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन उन्हें कांस्य पदक दिलाने के लिए पर्याप्त रहा।इस स्पर्धा में नाइजीरिया के रिलवान इड्रिस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग 131.0 अंक के साथ रजत पदक हासिल करने में सफल रहे। भारत के एक अन्य खिलाड़ी सुधीर 114.1 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहे।

‘ऐसा लग रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं’

ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद झंडू कुमार की खुशी शब्दों में बयां नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा, “आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं। यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ पदक है। मेरे मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि किसी भी कीमत पर देश के लिए मेडल जीतना है।”

5 साल की उम्र में पोलियो, फिर भी नहीं मानी हार

झंडू कुमार बिहार के नालंदा जिले के हरनौत बाजार के रहने वाले हैं। महज पांच वर्ष की उम्र में वह पोलियो की चपेट में आ गए थे। शारीरिक चुनौती के साथ-साथ आर्थिक तंगी ने भी उनका बचपन कठिन बना दिया। परिवार की मदद करने और अपने खेल का खर्च उठाने के लिए उन्होंने सब्जियां बेचीं और ई-रिक्शा तक चलाया।खेल के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया, ताकि प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का खर्च जुटाया जा सके।

पैरा एथलेटिक्स से पावरलिफ्टिंग तक का सफर

झंडू ने अपने खेल करियर की शुरुआत पैरा एथलेटिक्स से की थी, जहां उन्होंने शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में जिला और राज्य स्तर पर कई पदक जीते। वर्ष 2022 में अपने कोच की सलाह पर उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग में कदम रखा और कोलकाता में आयोजित पहले ही टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।इसके बाद उन्होंने लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ। वर्ष 2025 में 72 किलोग्राम वर्ग में 205 और फिर 206 किलोग्राम वजन उठाकर दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने वर्ल्ड कप और एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते, जबकि विश्व चैंपियनशिप में शीर्ष-6 खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी

झंडू कुमार की कहानी केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और अटूट विश्वास की मिसाल है। गरीबी, शारीरिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। ग्लासगो में जीता गया यह कांस्य पदक न केवल भारत के लिए पहला पदक है, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी बन गया है।

कांवड़ यात्रा पर सीएम योगी का सख्त संदेश: हुड़दंग, अफवाह और माहौल बिगाड़ने वालों की अब खैर नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए साफ कर दिया है कि आस्था के इस महापर्व के दौरान किसी भी तरह का हुड़दंग, अव्यवस्था, अफवाह या सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा, श्रावणी शिवरात्रि, चेहल्लुम, स्वतंत्रता दिवस, बारावफात और रक्षाबंधन को लेकर तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था से लेकर यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था तक हर पहलू को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए।

अफवाह फैलाने वालों पर होगी तत्काल कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अफवाह फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ तुरंत और कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भ्रामक और फर्जी सूचनाओं का तत्काल खंडन किया जाए और ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।

पूरे प्रदेश में लागू होगा ‘मेरठ मॉडल’

कांवड़ यात्रा के सफल संचालन के लिए मेरठ जोन द्वारा विकसित प्रबंधन मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को कांवड़ संघों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने तथा शिविर संचालकों का समय रहते सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

सीएम योगी ने कांवड़ मार्गों की क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए। साथ ही मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, मोबाइल शौचालय और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। महिलाओं की सुविधा के लिए प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल कैंप पूरी तरह सक्रिय रखने, एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा एंटी-वेनम और एंटी-रेबीज इंजेक्शन सहित सभी आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मांस और शराब की दुकानें रहेंगी बंद

मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कांवड़ मार्गों पर मांस और शराब की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए। इसके अलावा खाद्य पदार्थों में मिलावट, गंदगी फैलाने और श्रद्धालुओं से अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए। प्रत्येक दुकान पर संचालक का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

डीजे की आवाज तय सीमा में, ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डीजे की ध्वनि निर्धारित मानकों से अधिक नहीं होनी चाहिए। अत्यधिक शोर किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए संवेदनशील स्थानों पर CCTV कैमरे, ड्रोन निगरानी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और VIP मूवमेंट भी इस तरह संचालित हो कि आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जनप्रतिनिधियों से भी ली जाएगी राय

सीएम योगी ने निर्देश दिया कि अगले दो-तीन दिनों के भीतर सभी जिलों में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की जाए और उनके सुझावों को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए।

आस्था और व्यवस्था दोनों सर्वोपरि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का महापर्व है। ऐसे में सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने दोहराया कि यात्रा के दौरान कानून हाथ में लेने, अफवाह फैलाने या माहौल खराब करने की किसी भी कोशिश पर प्रशासन तुरंत और सख्त कार्रवाई करेगा।

देवेंद्रजी महाराष्ट्र में ही रहेंगे : केंद्र जाने की अटकलों के बीच अमृता फडणवीस का बड़ा बयान

मुंबई/पंढरपुर। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के केंद्रीय राजनीति में जाने की चर्चाओं के बीच उनकी पत्नी अमृता फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर स्थित भगवान विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र में ही रहकर जनता की सेवा करें।

अमृता फडणवीस ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं महाराष्ट्र में रहना चाहती हूं और यह सुनिश्चित करूंगी कि देवेंद्रजी भी महाराष्ट्र में ही रहें।” उनके इस बयान को मुख्यमंत्री की भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर चल रही अटकलों के बीच अहम माना जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने दावा किया था कि आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाया जा सकता है और महाराष्ट्र में उनकी जगह भाजपा का कोई अन्य नेता मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अमृता फडणवीस के बयान ने इन चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।

पेपर लीक पर छात्रों के साथ, लेकिन हिंसा के खिलाफ

राज्य में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए अमृता फडणवीस ने कहा कि यदि आंदोलन केवल पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर केंद्रित है, तो वह पूरी तरह उचित और लोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस समस्या को खत्म करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है और आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।उन्होंने कहा, “सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों। छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप सुधार किए जा रहे हैं।”

‘हिंसा किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं’

आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर अमृता फडणवीस ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चाहे हिंसा छात्रों के खिलाफ हो या पुलिसकर्मियों के खिलाफ, दोनों ही स्थितियां लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं।उन्होंने कहा, “हिंसा आंदोलन का सबसे काला अध्याय होती है। ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। जो लोग हिंसा और दुर्व्यवहार में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

अभिव्यक्ति की आजादी का किया समर्थन

अमृता फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और हर कलाकार को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोगों का अपने अधिकारों का लोकतांत्रिक तरीके से प्रयोग करना स्वस्थ समाज की पहचान है।

भगवान विट्ठल से किसानों और प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना

पंढरपुर में दर्शन के बाद अमृता फडणवीस ने बताया कि उन्होंने भगवान विट्ठल से महाराष्ट्र और पूरे देश की सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली तथा जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े और हर नागरिक का जीवन खुशहाल बने, यही उनकी कामना है।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा

अमृता फडणवीस का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संभावित केंद्रीय भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा, लेकिन उनके बयान ने साफ कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता महाराष्ट्र ही है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा नेतृत्व इस विषय पर क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।