वॉशिंगटन, 17 जून: अमेरिका ने एक अहम प्रशासनिक बदलाव करते हुए ‘अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान’ का नाम बदलकर फिर से ‘अमेरिकी प्रशांत कमान (USPACOM)’ कर दिया है। यह कदम कमान के पुराने नाम और ऐतिहासिक पहचान को बहाल करने के रूप में देखा जा रहा है।अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (United States Department of Defense) के अनुसार, यह कमान 1947 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा स्थापित की गई थी। दशकों तक यह ‘USPACOM’ नाम से ही जानी जाती रही और इसे अमेरिका की सबसे पुरानी और बड़ी संयुक्त सैन्य कमानों में से एक माना जाता है।
- नाम बदलने का कारण
मंत्रालय का कहना है कि पुराना नाम बहाल करने का उद्देश्य कमान की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देना और प्रशांत क्षेत्र में तैनात सैनिकों में सामूहिक गर्व की भावना को मजबूत करना है। इसके साथ ही यह निर्णय संगठनात्मक परंपरा और पहचान को फिर से स्थापित करने के रूप में देखा जा रहा है।
- पहले क्या बदलाव हुआ था?
साल 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री James Mattis के कार्यकाल में इसका नाम बदलकर ‘हिंद-प्रशांत कमान’ रखा गया था। उस समय उद्देश्य हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाना था।
- रणनीतिक महत्व
यह कमान अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैले विशाल क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सहयोग का संचालन करती है। इसका फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सहयोगी देशों के साथ समन्वय बनाए रखना है।
उस समय के राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल में यह नाम परिवर्तन और बाद में अब इसे वापस पुराने नाम पर लाना, दोनों ही निर्णय अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीति की दिशा को दर्शाते हैं।अमेरिका का यह कदम केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उसकी सैन्य परंपरा और रणनीतिक प्राथमिकताओं में संतुलन को दर्शाता है। हालांकि नाम पुराना हो गया है, लेकिन कमान का मिशन और क्षेत्रीय सहयोग की नीति पहले जैसी ही बनी हुई है।

