वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने 14 बिंदुओं वाले एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जो अब प्रभावी हो चुका है। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।इस समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियों को बहाल करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना है।
- युद्धविराम और सैन्य कार्रवाई पर रोक
समझौते के तहत अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करेंगे। इसमें लेबनान भी शामिल है। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी नई सैन्य कार्रवाई या धमकी से बचेंगे तथा क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करेंगे।
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। ईरान ने भरोसा दिया है कि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी और किसी प्रकार का टोल या शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
- 300 अरब डॉलर का विकास फंड
समझौते के तहत ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का विशेष फंड बनाया जाएगा। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसे इस फंड में सीधे आर्थिक योगदान देने की बाध्यता नहीं होगी।
- आर्थिक प्रतिबंध हटाने पर सहमति
अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति जताई है। हालांकि इसकी विस्तृत समयसीमा अंतिम समझौते में तय की जाएगी। प्रतिबंधों में राहत ईरान द्वारा समझौते की शर्तों का पालन करने पर निर्भर करेगी।
- परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का वादा किया है। साथ ही उसके पास मौजूद उच्च संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में कम संवर्धित स्तर पर लाने की प्रक्रिया तय की जाएगी।
- फ्रीज़ संपत्तियां होंगी जारी
अमेरिका ने ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्तियों और प्रतिबंधित फंड तक पहुंच बहाल करने का भी आश्वासन दिया है। हालांकि यह प्रक्रिया भी ईरान के प्रदर्शन और समझौते के पालन पर निर्भर करेगी।
- 60 दिनों में अंतिम समझौते की कोशिश
एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद अब दोनों देशों के पास अंतिम व्यापक समझौते को तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय होगा। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को दोनों पक्षों की सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।
- अभी भी कई सवाल बाकी
हालांकि इस समझौते को मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अभी स्पष्टता नहीं है। विशेष रूप से प्रतिबंध हटाने की समयसीमा, परमाणु सामग्री के निपटान की प्रक्रिया और निगरानी तंत्र जैसे विषयों पर आगे की बातचीत में फैसला होगा।

