Sunday, June 21, 2026

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रायपुर रेल मंडल के तीन बड़े फैसले फ्लॉप, यात्रियों को नहीं मिला योजनाओं का लाभ

रायपुर। यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने और रेलवे व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रायपुर रेल मंडल ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की थी। हालांकि, पर्याप्त तैयारी और समन्वय के अभाव में ये तीनों योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं और फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई हैं।सबसे पहले रेलवे ने एसी कोच की तर्ज पर स्लीपर कोच के यात्रियों को भी चादर और कंबल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर एजेंसी का चयन भी कर लिया गया, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण योजना शुरू नहीं हो पाई।इसी तरह यात्रियों और कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए स्टेशन परिसर में ‘जनता दरबार’ लगाने की घोषणा की गई थी। सप्ताह में एक दिन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शिकायतें सुनने की व्यवस्था बनाई गई, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण यह पहल भी बंद हो गई।वहीं, टीटीई की ड्यूटी के दौरान सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए ब्रीथ एनालाइजर मशीन के जरिए एल्कोहल टेस्ट की व्यवस्था शुरू की गई थी। रेलवे ने दावा किया था कि विमानन क्षेत्र की तरह टीटीई भी ड्यूटी पर जाने और लौटने से पहले जांच प्रक्रिया से गुजरेंगे, लेकिन कुछ ही समय बाद यह व्यवस्था भी बंद कर दी गई।

  • स्लीपर कोच में बेडरोल योजना अटकी

रेलवे ने 25 फरवरी को स्लीपर यात्रियों को बेडरोल उपलब्ध कराने के लिए टेंडर फाइनल किया था। लेकिन कोच में बेडरोल रखने के लिए दो बर्थ हटाने की आवश्यकता और अन्य रेलवे जोनों से अनुमति नहीं मिलने के कारण योजना अटक गई। अधिकारियों के अनुसार सीट ब्लॉकिंग और समन्वय संबंधी समस्याओं के चलते व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।

  • जनता दरबार में नहीं मिले पर्याप्त लोग

9 अप्रैल 2025 से शुरू की गई जनता दरबार योजना का उद्देश्य यात्रियों और कर्मचारियों की शिकायतें सीधे सुनना था। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसमें अपेक्षित संख्या में लोग नहीं पहुंचे। अब अधिकारी स्टेशन परिसर में ही यात्रियों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का दावा कर रहे हैं।

  • टीटीई का एल्कोहल टेस्ट भी हुआ बंद

6 सितंबर 2025 को रायपुर स्टेशन में ब्रीथ एनालाइजर मशीन के जरिए टीटीई का एल्कोहल टेस्ट शुरू किया गया था। शुरुआती ट्रायल के बाद तकनीकी कारणों का हवाला देकर इस व्यवस्था को रोक दिया गया। वर्तमान में जांच प्रक्रिया पूरी तरह बंद है।

  • रेलवे का दावा- जल्द लागू होंगी योजनाएं

सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार के अनुसार, स्लीपर कोच में बेडरोल उपलब्ध कराने के लिए कुछ रेलवे जोनों, विशेषकर नॉर्दर्न रेलवे, से अनुमति मिलना बाकी है। उन्होंने कहा कि अन्य ट्रेनों के लिए मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही यह सुविधा शुरू की जाएगी।जनता दरबार के संबंध में उनका कहना है कि कम उपस्थिति के कारण इसकी उपयोगिता सीमित रही, इसलिए अधिकारी सीधे यात्रियों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।हालांकि सवाल यह है कि यात्रियों की सुविधा के लिए बड़े दावों के साथ शुरू की गई ये योजनाएं आखिर कब जमीन पर उतरेंगी और यात्रियों को उनका वास्तविक लाभ कब मिलेगा।

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