रायपुर/कोरिया। छत्तीसगढ़ के अमूमन शांत माने जाने वाले कोरिया जिले के सोनहत (कटगोड़ी) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पूर्व जनपद अध्यक्ष भरत सिंह गहरवार (उर्फ लल्ला सिंह) की निर्मम हत्या के बाद राज्य का सियासी और सामाजिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस वीभत्स हत्याकांड को लेकर अब राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने सूबे की साय सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर सरकार और प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं। उन्होंने दोटूक लहजे में अल्टीमेटम दिया है— “न्याय दिलाबो, नई तो छत्तीसगढ़ बंद कराबो।”
वारदात की क्रूरता: सुनियोजित तरीके से जिंदा जलाने का प्रयास
इस हत्याकांड को अंजाम देने का तरीका बेहद खौफनाक और पेशेवर था। हमलावरों ने भरत सिंह गहरवार की फॉर्च्यूनर गाड़ी को आगे-पीछे से डंपर अड़ाकर घेरा, गाड़ी के दरवाजे लॉक किए और पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाने का प्रयास किया। शुरुआती जांच के अनुसार, यह पूरा विवाद कैलाशपुर और तेलीमुड़ा जैसे इलाकों में सक्रिय अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के सिंडिकेट (रेत माफिया) के वर्चस्व से जुड़ा हुआ है।
सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो में बोलते हुए वीरेंद्र सिंह तोमर
https://www.facebook.com/vstomarofficial/videos/2251411672361940
करणी सेना की मुख्य मांगें: ‘यूपी मॉडल’ और ‘बुलडोजर जस्टिस’
फेसबुक लाइव के माध्यम से समाज और सरकार को सख्त संदेश देते हुए वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि छत्तीसगढ़ को अब सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता। अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए संगठन ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है:
स्पेशल एनकाउंटर की मांग: वारदात में शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं और हत्यारों का तत्काल पुलिस एनकाउंटर किया जाए।
बुलडोजर कार्रवाई: घटना के मुख्य आरोपियों (जैसे अक्षत त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी आदि) के रसूख और उनकी अवैध संपत्तियों पर 48 घंटे के भीतर सरकारी बुलडोजर चलाया जाए।
CBI जांच की मांग: करणी सेना ने स्थानीय पुलिसिया जांच को पूरी तरह खारिज करते हुए मामले की निष्पक्षता और पर्दे के पीछे छिपे सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब करने के लिए जांच तुरंत CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपने की मांग की है।
मंत्रियों का मौन और प्रशासनिक साख पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में करणी सेना ने सरकार के मंत्रियों और आला अफसरों पर ‘मिलीभगत’ और ‘मौन’ रहने का गंभीर आरोप लगाया है। तोमर ने सवाल उठाया कि सत्ताधारी दल के ही एक कद्दावर नेता की ऐसी वीभत्स हत्या होने के बाद भी सरकार के बड़े मंत्रियों की रहस्यमयी खामोशी क्यों है? क्या इस हत्याकांड के पीछे छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी और रेत माफिया का कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है?
करणी सेना का सामाजिक संकल्प
“कोरिया की पावन धरती पर हमारे भाई भरत सिंह गहरवार को जिस तरह जिंदा जलाया गया, वह पूरे सवर्ण और क्षत्रिय समाज के स्वाभिमान पर सीधा आघात है। जब तक पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, समाज का कोई भी व्यक्ति चैन से नहीं बैठेगा।”
‘प्रदेश ठप’ करने की धमकी, राष्ट्रीय नेतृत्व की एंट्री
यह लड़ाई अब राष्ट्रीय स्तर पर लड़ने की तैयारी हो चुकी है। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष **डॉ. राज शेखावत** की अगुवाई में देश और प्रदेश भर से हजारों कार्यकर्ता “कोरिया कूच” करेंगे। इसके बाद छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा उग्र आंदोलन और प्रदेशव्यापी ‘चक्का जाम’ किया जाएगा, जिससे पूरा सूबा ठप हो जाएगा।
साय सरकार के सामने बड़ी परीक्षा
अब गेंद मुख्यमंत्री और गृह विभाग के पाले में है। एक तरफ पीड़ित परिवार और आक्रोशित समाज को संतुष्ट करने के लिए कड़े कदम उठाने का भारी दबाव है, वहीं दूसरी तरफ राज्य को किसी भी तरह की अराजकता या आर्थिक नाकेबंदी से बचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि साय सरकार इस प्रशासनिक और सामाजिक संकट से कितनी दृढ़ता और सूझबूझ के साथ निपटती है।
