- फ्लाइट नंबर: AI-171 (अहमदाबाद से लंदन गैटविक)
- क्या हुआ था?विमान ने रनवे से उड़ान भरी ही थी कि महज 32 सेकंड के भीतर आसमान में कुछ ऐसा हुआ कि 242 यात्रियों को लेकर उड़ रहा बोइंग 787 ड्रीमलाइनर तेजी से नीचे गिरने लगा। विमान पास ही के बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल कॉम्प्लेक्स पर जा गिरा।
- खौफनाक आंकड़े:इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवा दी। कुल 260 लोगों की मौत ने देश को हिलाकर रख दिया। इस महाविनाश में ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश एकमात्र ऐसे खुशकिस्मत यात्री थे, जो चमत्कारिक रूप से जीवित बचे।
हादसे के बाद जब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने ब्लैक बॉक्स की जांच की, तो कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से एक ऐसा सनसनीखेज सच सामने आया जिसने पूरी जांच का रुख मोड़ दिया।
- पायलट 1: “आपने (फ्यूल) क्यों काटा?”
- पायलट 2 (तुरंत जवाब देता है): “मैंने ऐसा नहीं किया!”
इसके तुरंत बाद एक जोरदार धमाका होता है और विमान क्रैश हो जाता है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, टेक-ऑफ के ठीक बाद दोनों इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच “RUN” से “CUTOFF” मोड पर चले गए थे। हालांकि, पायलटों ने आखिरी वक्त में स्विच को दोबारा “RUN” पर करने और इंजन को रीस्टार्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन तब तक विमान इतनी कम ऊंचाई पर आ चुका था कि संभलने का मौका ही नहीं मिला।
लॉकिंग मैकेनिज्म के बावजूद कैसे बंद हुआ फ्यूल स्विच? पायलट एरर या सिस्टम का जानलेवा फेलियर?
एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के फ्यूल कंट्रोल स्विच में एक बेहद मजबूत ‘लॉकिंग मैकेनिज्म’ होता है, ताकि उड़ान के दौरान गलती से भी वह बंद न हो। दोनों स्विच को एक साथ बंद करने के लिए जानबूझकर और काफी ताकत लगाकर घुमाना पड़ता है। इसी वजह से शक की सुई पायलट की गलती या किसी आत्मघाती कदम की तरफ घूम रही है।
- अनुभवी थे पायलट: फ्लाइट की कमान 56 साल के कैप्टन सुमीत सभरवाल के हाथों में थी, जिन्हें 15,600 घंटे से ज्यादा की उड़ान का विशाल अनुभव था। उनके साथ 32 साल के फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर थे, जो पूरी तरह योग्य थे। चश्मदीदों के मुताबिक, क्रैश के बाद जब पायलट सुमित का शव मिला, तो वह बैठी हुई मुद्रा में थे और आखिरी सांस तक विमान का कंट्रोल थामे हुए थे।
- इंजन की जांच में देरी: अभी तक जांच एजेंसी AAIB ने किसी भी ‘साजिश’ या ‘जानबूझकर किए गए कदम’ की पुष्टि नहीं की है। अंतिम जांच रिपोर्ट में देरी इसलिए हो रही है क्योंकि विमान के GE एयरोस्पेस इंजन की गहरी तकनीकी जांच चल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह किसी अदृश्य सॉफ्टवेयर या सिस्टम फेलियर का नतीजा तो नहीं था?
हेडलाइन: एक साल बाद भी अपनों के फोन में गूंज रहे हैं आखिरी मैसेज, इंसाफ के इंतजार में पीड़ित परिवार।
हादसे की पहली बरसी पर पीड़ितों के परिवारों के आंसू आज भी सूखे नहीं हैं। किसी के मोबाइल में उसके बेटे का आखिरी मैसेज आज भी सेव है— “पापा मैं फ्लाइट में बैठ गया, लंदन पहुंचकर फोन करता हूं।” वो फोन तो कभी नहीं आया, लेकिन पीछे छोड़ गया कभी न खत्म होने वाला इंतजार। पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब तक अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती और हादसे की असली वजह साफ नहीं होती, तब तक उनके अपनों को सच्चा इंसाफ नहीं मिलेगा।

