Saturday, June 13, 2026

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बंगाल की सियासत में भूचाल: ‘ममता के स्वभाव के कारण ही टूटती है पार्टी’, मणिशंकर अय्यर के बयान से भड़की तृणमूल।

बंगाल में ममता को अपनों ने दिया दगा, सांसदों-विधायकों की बगावत से हिला कोलकाता का किला!

  • सांसदों का बड़ा विद्रोह:TMC में हुई इस कथित टूट को लेकर मणिशंकर अय्यर ने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। उन्होंने दावा किया है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में TMC के लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने एक अलग संसदीय समूह (Sessional Group) बना लिया है और भाजपा नीत एनडीए (NDA) को समर्थन देने का बड़ा फैसला किया है।
  • इस्तीफों की झड़ी:लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी ममता को झटका लगा है; 3 राज्यसभा सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
  • विधायकों की सामूहिक बगावत:पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी ममता अकेले पड़ती दिख रही हैं। कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायकों ने पार्टी से नाता तोड़कर अलग गुट का दामन थाम लिया है। विधानसभा चुनाव में हार के कुछ ही हफ्तों बाद आए इस सियासी तूफान ने सबको हैरान कर दिया है।

‘यही जिद ताकत है और यही कमजोरी’… अय्यर ने बताया क्यों बिखर रही है दीदी की सेना?

  • क्या है ममता का ‘मर्क्यूरियल स्वभाव’?मणिशंकर अय्यर ने ममता बनर्जी के व्यक्तित्व को ‘मर्क्यूरियल’ (बेहद तेज, भावुक, अप्रत्याशित और फैसलों पर अड़ जाने वाला) बताया। उन्होंने कहा कि ममता का यही अंदाज था जिसने उन्हें संघर्षों से निकालकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया। लेकिन आज, जब पार्टी संकट में है, तो उनका यही स्वभाव अपनों को दूर कर रहा है और बगावत की वजह बन गया है।
  • क्यों दूरी बना रहे हैं टीएमसी नेता?अय्यर ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की नब्ज टटोलते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद इन नेताओं में असुरक्षा की भावना घर कर गई है। जिन नेताओं का अपना कोई मजबूत जनाधार नहीं था और जो अब तक सिर्फ ममता के नाम पर राजनीति चमका रहे थे, वे अब अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए ठिकाने तलाश रहे हैं।

राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ेगा दीदी का कद! मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस को भी चेताया!

  • कम नहीं हुई ममता की धमक:इतने बड़े संकट के बाद भी मणिशंकर अय्यर का मानना है कि ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा खत्म नहीं हुई है। वामपंथियों के खिलाफ 12-13 साल तक सड़क पर लाठियां खाने वाली ममता का ‘जुझारू और कभी हार न मानने वाला’ रवैया आज भी विपक्ष की सबसे बड़ी पूंजी है।
  • इंडिया (INDIA) गठबंधन के लिए अनिवार्य:अय्यर ने साफ कहा कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार को मजबूत चुनौती देनी है, तो विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ को ममता बनर्जी जैसे निडर नेतृत्व की सख्त जरूरत है। अगर ममता विपक्ष में सक्रिय नहीं रहीं, तो गठबंधन के भविष्य पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो जाएंगे।
  • कांग्रेस को पुरानी गलती की याद दिलाई:तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए अय्यर ने अपनी ही पार्टी को चेताया कि चुनाव के बाद विजेता दल को अंधाधुंध समर्थन देना कांग्रेस की एक बड़ी राजनीतिक भूल थी, जिससे गठबंधन की एकता कमजोर हुई।

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