Tuesday, October 20, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

कस्टम मिलिंग घोटाला: कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे गए

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पांच दिन की ईडी रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट में पेशी

दी गई जानकारी के अनुसार, ईडी ने रामगोपाल अग्रवाल को करीब 140 करोड़ रुपये के कथित कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। पूछताछ के लिए एजेंसी ने उन्हें पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लिया था।

रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद ईडी ने उन्हें अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।

क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला मामला?

यह मामला खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 से जुड़ा बताया गया है। उस दौरान कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल की गई थी।

जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत मिल मालिकों से दो किस्तों में 20-20 रुपये प्रति क्विंटल की कथित वसूली की गई। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल पार्टी फंड जुटाने के लिए किया गया था। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

ईडी पहले भी दाखिल कर चुकी है आरोप-पत्र

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ईडी वर्ष 2024 में इस मामले में अदालत के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है। एजेंसी का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल से पहले अपेक्षित पूछताछ नहीं हो पाई थी। गिरफ्तारी से पहले रायपुर जेल में भी उनसे तीन दिन तक पूछताछ किए जाने की जानकारी दी गई है।

इसके बाद आगे की जांच के लिए उन्हें कस्टडी में लिया गया था। पांच दिन की रिमांड पूरी होने के बाद अब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

आगे की जांच पर नजर

रामगोपाल अग्रवाल को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि, कथित वसूली और रकम के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों पर अदालत में होने वाली कार्यवाही अहम होगी।

गौरतलब है कि न्यायिक रिमांड का आदेश अपने-आप में आरोपों को साबित नहीं करता। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।

Popular Articles