Monday, August 24, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

छत्तीसगढ़ की माटी, खेती और प्रकृति को समर्पित हरेली : वीरेन्द्र सिंह तोमर

रायपुर। राज्य के प्रमुख किसान नेता एवं क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक प्रथम तिहार ‘हरेली’ की गाड़ा-गाड़ा बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी और कुटकी दाई से प्रदेश में अच्छी फसल, सुख-समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे की कामना की।

तोमर ने कहा कि हरेली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, लोक परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान की जीवंत अभिव्यक्ति है। सावन अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व प्रदेश में तिहारों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

खेती-किसानी और प्रकृति को समर्पित पर्व

वीरेन्द्र सिंह तोमर के मुताबिक छत्तीसगढ़ में हरेली के साथ ही पारंपरिक तिहारों की श्रृंखला शुरू होती है। सदियों पुरानी इस परंपरा में कृषि उपकरणों की पूजा, पशुधन का सम्मान और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा रही है।

उन्होंने कहा कि हरेली के दिन हल, फावड़ा, कुदाल सहित कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है। यह परंपरा किसानों के जीवन में कृषि उपकरणों के महत्व को दर्शाती है। किसान इन उपकरणों को केवल साधन नहीं, बल्कि खेती और अन्न उत्पादन में सहयोगी मानकर सम्मान देते हैं।

पशुधन के सम्मान का भी संदेश

तोमर ने कहा कि हरेली पर्व में गाय-बैल सहित पशुधन की पूजा और सेवा की जाती है। कृषि प्रधान समाज में पशुधन की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में हरेली पशुओं के प्रति संवेदना, कृतज्ञता और सम्मान का संदेश भी देता है।

गेड़ी और पारंपरिक खेलों से जुड़ी है हरेली की पहचान

हरेली की खास पहचान गेड़ी भी है। पर्व के दौरान बच्चे और युवा गेड़ी चढ़कर उत्साह और उमंग के साथ पारंपरिक खेलों का आनंद लेते हैं। इसके अलावा गेड़ी दौड़, डंडा-पचरंगा, अत्ती-पत्ती, फुगड़ी, बिल्लस और खो-खो जैसे खेल छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सामुदायिक जीवन की झलक पेश करते हैं।

तोमर ने कहा कि इन पारंपरिक खेलों के माध्यम से हरेली स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और सामूहिक सहभागिता का संदेश भी देता है।

छत्तीसगढ़ी पकवानों से महकता है पर्व

किसान परिवार से आने वाले वीरेन्द्र सिंह तोमर ने हरेली की पारंपरिक खान-पान संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवसर पर घरों में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। बोबरा, खुरमी, ठेठरी, बड़ा, सोहारी, गुड़हा चीला, गुलगुला भजिया, अईरसा और चौसेला जैसे पकवान हरेली की खुशियों को और बढ़ा देते हैं।

‘माटी और संस्कृति से जुड़ने का अवसर’

वीरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों से हरेली पर्व को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाने की अपील करते हुए कहा कि यह तिहार हमें अपनी माटी, खेती, पशुधन, प्रकृति और लोक संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है।

Popular Articles