बेंगलुरु (कर्नाटक): भारत और अमेरिका ने नागरिक और व्यावसायिक अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। दोनों देशों ने भविष्य में विज्ञान, अंतरिक्ष तकनीक और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी तकनीकों में मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
यह चर्चा 5-6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मुख्यालय में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (CSJWG) की 9वीं बैठक के दौरान हुई। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया हिस्सा
बैठक के उद्घाटन सत्र को ISRO के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संबोधित किया।
भारतीय पक्ष की सह-अध्यक्षता UR राव सैटेलाइट सेंटर के निदेशक एम. संकरन ने की, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. वेस्ली ब्रूक्स और कैथलीन कारिका ने किया।
NISAR मिशन की सफलता के बाद सहयोग बढ़ाने पर जोर
यह बैठक भारत-अमेरिका की TRUST (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology) पहल के तहत आयोजित की गई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन की सफलता के बाद अंतरिक्ष सहयोग को नए क्षेत्रों तक ले जाने पर चर्चा की।
NISAR मिशन को भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। दोनों देशों ने वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने की संभावनाओं पर विचार किया।
ISRO को Moon Base कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता
बैठक के दौरान अमेरिका ने Artemis Accords के तहत भारत के साथ अंतरिक्ष सहयोग को और आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। NASA की ओर से ISRO को अपने Moon Base कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की बात भी सामने आई है।
इसके साथ ही दोनों देशों ने वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के लिए ओपन साइंटिफिक डेटा शेयरिंग पर बातचीत आगे जारी रखने पर सहमति जताई।
अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता पर भी चर्चा
भारत और अमेरिका ने बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र की COPUOS (Committee on the Peaceful Uses of Outer Space) से जुड़े दिशा-निर्देशों को आगे बढ़ाने और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण एवं टिकाऊ उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।


