Saturday, July 25, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बनी नजर, मोदी सरकार कई अहम विधेयक करेगी पेश

नई दिल्ली। संसद का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। इस सत्र में केंद्र की मोदी सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है। सरकार की प्राथमिकता में राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायिक व्यवस्था, शिक्षा, कर सुधार, एमएसएमई और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम बिल शामिल हैं। वहीं, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं, हालांकि अभी तक सरकार की आधिकारिक विधायी सूची में इन दोनों विधेयकों का उल्लेख नहीं किया गया है।

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर सबकी नजर

संसद के मानसून सत्र से पहले सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर हो रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सरकार 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को दोबारा संसद में ला सकती है। पिछले सत्र में विपक्ष के विरोध के कारण यह विधेयक आगे नहीं बढ़ सका था। हालांकि लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी विधेयकों की सूची में फिलहाल इसका उल्लेख नहीं है। माना जा रहा है कि यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलती है तो सत्र के दौरान इसे पेश किया जा सकता है।

FCRA संशोधन विधेयक फिर आएगा सदन में

सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill) को भी संसद में विचार और पारित कराने की तैयारी में है। यह विधेयक पहले बजट सत्र में पेश किया गया था, लेकिन उस समय इस पर चर्चा नहीं हो सकी थी। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाना है।

‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर सख्त कानून की तैयारी

मानसून सत्र में सरकार राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी। प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में बाधा उत्पन्न करने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के सम्मान को कानूनी सुरक्षा देना आवश्यक है।

जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे और सख्त

सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी सदन में लाने जा रही है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक देरी से कराया जाता है, तो अब केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) के आदेश पर ही उसका पंजीकरण संभव होगा। वर्तमान व्यवस्था में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति पर्याप्त होती है।

सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे न्यायाधीश

सरकार सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक भी पेश करेगी। इसके माध्यम से उस अध्यादेश को संसद की मंजूरी दिलाई जाएगी, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई है। सरकार का तर्क है कि लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है।

उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी

मानसून सत्र में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक, 2025 भी चर्चा के लिए सूचीबद्ध है। इस विधेयक के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की जगह एक एकीकृत नियामक संस्था बनाने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे देश की उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

आयकर संशोधन और विदेशी निवेश को बढ़ावा

सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी संसद में पेश करेगी। इस विधेयक का उद्देश्य सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को दी गई कर छूट संबंधी अध्यादेश को कानून का रूप देना है। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी निवेश आकर्षित होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

MSME क्षेत्र के लिए भी आएगा नया कानून

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास संशोधन विधेयक, 2026 भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य छोटे उद्योगों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना तथा विवादों के त्वरित समाधान की व्यवस्था को मजबूत करना है। साथ ही राज्यों को MSME सुविधा परिषदों के गठन में अधिक लचीलापन देने का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार का फोकस सुधारों पर

केंद्र सरकार का कहना है कि मानसून सत्र में लाए जा रहे विधेयकों का उद्देश्य प्रशासनिक सुधार, न्याय व्यवस्था को मजबूत करना, शिक्षा क्षेत्र में बदलाव, निवेश को बढ़ावा देना और व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाना है। वहीं, विपक्ष की नजर महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दों पर रहेगी।संसद का यह मानसून सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बहुप्रतीक्षित विधेयकों को इस सत्र में पेश करती है या नहीं।

Popular Articles