नई दिल्ली। भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद दोनों देशों ने माइग्रेशन, यंग प्रोफेशनल्स, परिवहन तकनीक, रिसर्च और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े पांच प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने रक्षा उत्पादन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई।
रक्षा और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड ने सैन्य आदान-प्रदान तथा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान की है। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। रक्षा और परमाणु ऊर्जा से जुड़ा सहयोग अलग से हस्ताक्षरित समझौते के बजाय दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के रूप में सामने आया है।
भारतीय युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए खुलेंगे नए अवसर
माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप के तहत भारतीय नागरिकों के लिए स्विट्जरलैंड में लंबे समय के मल्टीपल-एंट्री वीजा की सुविधा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत वीजा पांच साल तक वैध हो सकता है और प्रत्येक यात्रा में छह महीने तक रहने की सुविधा मिल सकती है। छात्रों के लिए एक साल के रिन्यूएबल परमिट का भी प्रावधान किया गया है।
वहीं, Young Professionals Agreement के तहत दोनों देशों से हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स को एक-दूसरे के देश में अवसर मिल सकेंगे। जरूरत के अनुसार यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है। इससे युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर में तकनीकी सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड ने परिवहन तकनीक, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौता किया है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, टनल और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग, विशेषज्ञता साझा करने और क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाएगा।
रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। भारत के Department of Science and Technology और Swiss National Science Foundation के बीच वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त रिसर्च और नई परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के साथ इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। इससे स्टार्टअप और नई तकनीकों के विकास के लिए दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य
भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच लागू ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट के तहत भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और अगले 15 वर्षों में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड भारतीय कृषि उत्पादों, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सामान की स्विस बाजार में पहुंच बढ़ाने तथा भारत में स्विस निवेश को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
वैश्विक शांति और जिम्मेदार AI पर भी बनी सहमति
दोनों देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और स्विट्जरलैंड ने वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले वर्ष AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं दीं। दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में सहयोग जारी रखने पर भी जोर दिया। भारत-स्विट्जरलैंड के बीच हुए इन समझौतों को व्यापार, तकनीक, शिक्षा, रोजगार और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।


