Friday, July 10, 2026

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सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की बेचैनी, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक उदाहरणों से रखा पक्ष

नई दिल्ली | पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने के फैसले पर पाकिस्तान लगातार आपत्ति जता रहा है। पाकिस्तान भारत पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है, जबकि भारत का कहना है कि आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

भारत का स्पष्ट संदेश: राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि

भारत का मानना है कि जब किसी देश की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना रहे, तब अंतरराष्ट्रीय समझौतों की समीक्षा करना उसका अधिकार है। सरकार का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।

पाकिस्तान का आरोप, आतंकवाद पर चुप्पी

पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के पालन का मुद्दा उठा रहा है, लेकिन भारत का आरोप है कि वह सीमा पार आतंकवाद जैसे मूल मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता। भारत का कहना है कि विश्वास और सहयोग का माहौल बने बिना सामान्य संबंध संभव नहीं हैं।

भारत ने दिए अमेरिका, रूस और चीन के उदाहरण

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पी.आर. शंकर (सेवानिवृत्त) ने सोशल मीडिया पर कहा कि दुनिया की बड़ी शक्तियां भी अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए अंतरराष्ट्रीय समझौतों से पीछे हटती रही हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि—

  • अमेरिका ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर हो गया।
  • रूस ने INF संधि से खुद को अलग कर लिया।
  • चीन ने दक्षिण चीन सागर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया।

उनका तर्क है कि जब बड़े देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले ले सकते हैं, तो भारत भी अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे सकता है।

हालांकि परिस्थितियां अलग-अलग

विशेषज्ञों का कहना है कि इन तीनों अंतरराष्ट्रीय मामलों की कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियां सिंधु जल समझौते से अलग हैं। इसलिए इन उदाहरणों को सीधे तौर पर समान नहीं माना जा सकता। यह अधिकतर एक राजनीतिक और रणनीतिक तर्क के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कई बार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है। पाकिस्तान का कहना है कि सिंधु जल समझौता एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है और इसका पालन दोनों देशों की जिम्मेदारी है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कूटनीतिक और कानूनी बहस और तेज हो सकती है। भारत राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दे रहा है, जबकि पाकिस्तान संधि के पालन पर जोर बनाए हुए है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में यह मुद्दा आने वाले समय में भी अहम बना रह सकता है।

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