Friday, July 10, 2026

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सोना-चांदी में लगातार तीसरे दिन गिरावट, चांदी 8,400 रुपये टूटी खरीदारी करने वालों के लिए बढ़ा मौका

नई दिल्ली। घरेलू कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन भी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह की शुरुआत से ही दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है, लेकिन सबसे अधिक असर चांदी पर देखने को मिला है। महज तीन कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत करीब 8,400 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूट गई है, जबकि सोने के भाव में भी उल्लेखनीय नरमी आई है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती, निवेशकों की मुनाफावसूली और वायदा बाजार में बिकवाली के कारण सोना-चांदी के दाम दबाव में हैं। इसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

  • चांदी में बड़ी गिरावट

इस सप्ताह चांदी की कीमतों में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है। लगातार तीन दिनों की कमजोरी के चलते इसके दाम करीब 8,400 रुपये प्रति किलोग्राम तक नीचे आ गए हैं। हाल के महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाली चांदी अब लगातार फिसल रही है, जिससे निवेशकों और कारोबारियों की नजर बाजार की अगली चाल पर बनी हुई है।

  • सोना भी हुआ सस्ता

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी लगातार नरमी बनी हुई है। वायदा बाजार में 24 कैरेट सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना रहता है, तो आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए राहत

कीमतों में आई गिरावट से शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन से पहले आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को कुछ राहत मिली है। हालांकि ज्वेलर्स का कहना है कि खरीदारी करते समय केवल सोना या चांदी का मौजूदा भाव ही नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क को भी ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि अंतिम कीमत इन्हीं के आधार पर तय होती है।

  • क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाजार जानकारों के अनुसार, कीमती धातुओं में फिलहाल अस्थिरता का दौर जारी है। वैश्विक आर्थिक संकेतक, ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें और अंतरराष्ट्रीय मांग आने वाले दिनों में सोना-चांदी की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की चाल पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लंबे समय के निवेशकों के लिए कीमतों में गिरावट चरणबद्ध खरीदारी का अवसर हो सकती है, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

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