Friday, July 10, 2026

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इंडोनेशिया दौरे पर पीएम मोदी: ब्रह्मोस मिसाइल डील पर लग सकती है अंतिम मुहर

नई दिल्ली / जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (6 जुलाई) से इंडोनेशिया के तीन दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस द्विपक्षीय यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच ‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम’ की खरीद को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक रक्षा समझौता होने की प्रबल संभावना है। यह दौरा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रक्षा कूटनीति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगा।

  • मार्च के समझौते से आगे बढ़ेगी बातचीत

रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच होने वाली यह उच्च स्तरीय चर्चा इस साल मार्च में तय हुए शुरुआती ‘सिंगल-सिस्टम’ समझौते से काफी आगे जाएगी। इस बार की बातचीत में मुख्य फोकस तटीय और नौसैनिक रक्षा प्रणालियों के व्यापक विस्तार पर रहेगा। इंडोनेशिया अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए भारत की इस अचूक मिसाइल प्रणाली को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए बेहद उत्सुक है।

  • इंडो-पैसिफिक में भारत की मजबूत होती डिफेंस डिप्लोमेसी

भारत द्वारा निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात आज इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में देश की रक्षा कूटनीति का एक बेहद अहम और मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया के साथ होने वाली यह संभावित डील क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भारत के सामरिक संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी। यह कदम दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

  • दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में शामिल है ब्रह्मोस

भारत और रूस का यह संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) ‘ब्रह्मोस’, दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। अपनी बेजोड़ गति, सटीकता और ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) की तकनीक के कारण यह दुनिया भर में अपनी धाक जमा चुकी है।

  • समुद्री सुरक्षा और आसियान (ASEAN) पर विशेष ध्यान

प्रधानमंत्री मोदी के इस तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे का मुख्य एजेंडा केवल मिसाइल डील तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक फोकस समुद्री सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर व आसियान (ASEAN) क्षेत्र में आपसी तालमेल बढ़ाना भी है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे।

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