Tuesday, July 14, 2026

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चारा घोटाला केस में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जमानत रद्द करने से इनकार हाईकोर्ट को 6 महीने में अपील पर फैसला करने का निर्देश

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत और सजा पर रोक (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कई वर्षों से लागू राहत में इस चरण पर हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, अदालत ने मामले के शीघ्र निपटारे पर जोर देते हुए संबंधित हाईकोर्ट से लंबित आपराधिक अपील की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का अनुरोध किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बहुचर्चित चारा घोटाले के देवघर कोषागार (Deoghar Treasury) से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में विशेष CBI अदालत ने लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। बाद में उन्होंने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां उनकी सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि लालू यादव की अपील कई वर्षों से लंबित है और वे लंबे समय से जमानत पर हैं। ऐसे में इस स्तर पर उनकी जमानत रद्द करना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि न्याय तभी सार्थक होगा जब लंबित अपील का जल्द निपटारा हो। इसी वजह से कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह मामले की सुनवाई को प्राथमिकता देते हुए छह महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रयास करे।

जांच एजेंसी की क्या थी मांग?

जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई राहत को रद्द किया जाए और लालू यादव की सजा पर लगी रोक समाप्त की जाए। एजेंसी का कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें मिली राहत जारी नहीं रहनी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और जमानत को बरकरार रखा।

लालू यादव के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लालू प्रसाद यादव को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है। इसका मतलब है कि हाईकोर्ट में अपील पर अंतिम फैसला आने तक उनकी जमानत जारी रहेगी। हालांकि, यदि हाईकोर्ट अपील पर फैसला सुनाता है, तो उसी के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति तय होगी।राजनीतिक रूप से भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है, क्योंकि बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव अब भी एक प्रभावशाली नेता हैं और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख चेहरे बने हुए हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई पर रहेंगी। यदि अदालत छह महीने के भीतर अपील पर फैसला सुनाती है, तो चारा घोटाले के इस लंबे समय से लंबित मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पूरा हो जाएगा। तब तक लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत और सजा पर रोक यथावत बनी रहेगी।

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