पटना: बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है। पार्टी इस सीट पर किसी भी तरह की चूक नहीं चाहती। यही वजह है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नितिन नवीन खुद पटना पहुंचकर चुनावी मोर्चा संभाल चुके हैं और लगातार नेताओं, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों का दौर चला रहे हैं।बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है। इस सीट का करीब दो दशक तक प्रतिनिधित्व नितिन नवीन ने किया और इसे पार्टी के सबसे सुरक्षित शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में गिना जाता है। लेकिन इस बार का उपचुनाव कई मायनों में अलग और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मुकाबला केवल सीट बचाने का नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने का भी है।
लगातार बैठकों के जरिए चुनावी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं। वे लगातार पार्टी पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, शक्ति केंद्र प्रभारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में चुनावी रणनीति, मतदाताओं तक पहुंच, प्रचार अभियान और मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।बीजेपी का लक्ष्य है कि एनडीए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को भारी मतों से जीत दिलाई जाए। पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि चुनाव प्रचार में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बीजेपी के लिए क्यों अहम है बांकीपुर?
बांकीपुर विधानसभा सीट केवल पटना की एक शहरी सीट नहीं, बल्कि बीजेपी के राजनीतिक प्रभाव का प्रतीक मानी जाती है। लंबे समय से यहां पार्टी का मजबूत जनाधार रहा है। ऐसे में यदि इस सीट पर बीजेपी को झटका लगता है तो विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।यही कारण है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है और संगठन को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतार दिया गया है।
मुकाबला हुआ दिलचस्प
इस बार बांकीपुर का चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। वहीं, बीजेपी ने अपने पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है।
तीन प्रमुख चेहरों के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद रोचक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत और जनाधार का भी संकेत देगा।
कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र
बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी का हर कार्यकर्ता इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर काम कर रहा है। नितिन नवीन ने बैठकों में कार्यकर्ताओं से घर-घर संपर्क अभियान तेज करने, नए मतदाताओं तक पहुंचने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया है।
वहीं, बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि एनडीए ने एक समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर बांकीपुर सीट पर एक बार फिर कमल खिलने जा रहा है।
सबकी नजरें बांकीपुर पर
बांकीपुर उपचुनाव अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बन चुका है। बीजेपी जहां अपनी परंपरागत सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं विपक्ष और नए राजनीतिक दल इस सीट पर जीत दर्ज कर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल एक विधायक चुनने का नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का भी संकेत माना जा रहा है।

