Saturday, July 11, 2026

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फर्जी रजिस्ट्रेशन का बड़ा खेल बेनकाब: चोरी के ट्रकों को ‘नई गाड़ी’ बनाकर देशभर में बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश

नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में चोरी के ट्रकों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने और उन्हें नई गाड़ियों के रूप में देशभर में बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में नागपुर के कपिल नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में 1,587 संदिग्ध ट्रकों की पहचान हुई है, जिनमें से 495 पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 223 वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है।

नागपुर ग्रामीण RTO के अधिकारी विजय चौहान के अनुसार यह गिरोह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सक्रिय था। गिरोह चोरी किए गए ट्रकों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराता था और बाद में उन्हें नई गाड़ी बताकर बेच देता था।

ऐसे चलता था फर्जीवाड़े का पूरा खेल

जांच में सामने आया कि गिरोह सबसे पहले चोरी के ट्रकों के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में फर्जी मैन्युअल दस्तावेज तैयार करता था। इन दस्तावेजों पर आवश्यक मुहरें और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश भेजा जाता था। इसके बाद VAHAN पोर्टल पर ट्रकों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर उन्हें नई गाड़ी के रूप में दर्ज कराया जाता था।

रजिस्ट्रेशन के लगभग 10 दिन बाद एनओसी प्राप्त कर ट्रकों को उन राज्यों में भेजा जाता था, जहां पहले से खरीदार तय रहते थे। वहां दोबारा रजिस्ट्रेशन कर इन वाहनों को नए ट्रक के रूप में बाजार में बेच दिया जाता था।

फिटनेस जांच में खुली पोल

पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कई ट्रक फिटनेस टेस्ट के लिए RTO पहुंचे। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई वाहनों के चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ की गई थी। कहीं ग्राइंडर से नंबर मिटाए गए थे तो कहीं नए नंबर उकेरे गए थे।

जब संदिग्ध चेसिस नंबरों की पुष्टि वाहन निर्माता कंपनियों से कराई गई तो कंपनियों ने स्पष्ट किया कि उन नंबरों वाले वाहन उन्होंने कभी बनाए ही नहीं थे। इसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

पुराने दस्तावेजों का किया जाता था दुरुपयोग

जांच में यह भी सामने आया कि जिन राज्यों में पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू नहीं थी, वहां की पुरानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) चोरी कर ली जाती थीं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कागजात तैयार कर मैन्युअल रिकॉर्ड बनाया जाता था और फिर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाती थी।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

RTO अधिकारी विजय चौहान ने दावा किया कि जांच के दौरान नागालैंड की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई हैं। उनके अनुसार कई मामलों में वाहन का भौतिक निरीक्षण, मालिक की मौजूदगी और स्थानीय पते के सत्यापन के बिना ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर दिया गया, जबकि मोटर वाहन अधिनियम के तहत यह प्रक्रिया अनिवार्य है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

RTO की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। मुंबई, मनमाड, नागपुर और चंद्रपुर समेत कई स्थानों से संदिग्ध ट्रकों को जब्त किया गया है। अधिकारियों के अनुसार अभी 1,000 से अधिक वाहनों का सत्यापन बाकी है और जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

मुख्य बिंदु:

  • 1,587 संदिग्ध ट्रकों की पहचान
  • 495 वाहनों पर कार्रवाई
  • 223 ट्रकों का रजिस्ट्रेशन रद्द
  • कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
  • फर्जी दस्तावेजों और बदले हुए चेसिस नंबरों के जरिए होता था रजिस्ट्रेशन
  • पुलिस और RTO की जांच जारी, और बड़े खुलासों की संभावना

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