बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम में पदस्थ अभियंताओं को बड़ी राहत दी है। पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में जारी वसूली संबंधी निर्देशों और कारण बताओ नोटिस पर न्यायालय ने रोक लगा दी है। मामले में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। यह मामला नगर निगम के 29 निर्माण अनुबंधों की जांच में सामने आई कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है।
29 अनुबंधों की जांच में सामने आईं अनियमितताएं
मामले के अनुसार, भिलाई नगर निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत वर्ष 2023 और 2024 में विभिन्न सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य कराए गए थे। इन कार्यों के लिए निर्धारित टेंडर प्रक्रिया पूरी करने और प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद ठेकेदारों को कार्यादेश जारी किए गए थे। निर्माण कार्य निगम की निधि के साथ-साथ 15वें वित्त आयोग के अनुदान से भी कराए गए थे।
बाद में इन कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत सामने आई। इसके बाद कलेक्टर दुर्ग के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं से संयुक्त जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन के अनुसार, पेवर ब्लॉक के 29 अनुबंधों की जांच में 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा और मौके पर मिली वास्तविक मात्रा के बीच अंतर पाया गया। रिपोर्ट में 16 लाख 85 हजार 457 रुपये के अधिक भुगतान का उल्लेख किया गया।
सात अभियंताओं को जारी किए गए थे नोटिस
जांच के बाद कलेक्टर दुर्ग ने 3 सितंबर 2026 को नगर निगम भिलाई के आयुक्त को पत्र जारी कर संबंधित कार्यों में माप दर्ज करने वाले अभियंताओं और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा अधिक भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद नगर निगम के मुख्य अभियंता ने उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिन्हा, रीमा हुमने और कृष्ण कुमार जंघेल के साथ सहायक अभियंता श्वेता वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इन अधिकारियों ने कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याचिकाकर्ताओं ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की गई। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित अभियंताओं को जांच प्रक्रिया में शामिल होने और अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि कलेक्टर के पत्र में पहले ही दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और वसूली के निर्देश दिए जा चुके थे। ऐसे में उनका कहना था कि संबंधित अधिकारियों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना आगे की कार्रवाई शुरू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने अदालत में दलील दी कि जब कार्रवाई के संबंध में पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हों, तो बाद में जारी कारण बताओ नोटिस की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। याचिकाकर्ताओं ने इसी आधार पर वसूली के निर्देशों और नोटिस को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर लगाई रोक, अधिकारियों से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए न्यायालय ने कलेक्टर दुर्ग के 3 सितंबर 2026 के पत्र में उल्लिखित कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और अधिक राशि की वसूली संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी। इसके साथ ही नगर निगम भिलाई के मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगाई गई है। हाईकोर्ट ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, कलेक्टर दुर्ग, नगर निगम भिलाई के आयुक्त, मुख्य अभियंता और कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
फिलहाल, न्यायालय के आदेश से संबंधित अभियंताओं को अंतरिम राहत मिली है। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की न्यायिक सुनवाई के बाद होगा।

