रायपुर। दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए अब इलाज सिर्फ दवाओं और ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहा। नया रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में हार्ट मरीज बच्चों को इलाज के साथ ‘खुशियों की थेरेपी’ भी दी जा रही है। डांस, म्यूजिक, पेंटिंग और आर्ट एंड क्राफ्ट जैसी रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटा रही हैं और उनकी रिकवरी में भी सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं।
अस्पताल में दूर-दराज के राज्यों से आने वाले बच्चे और उनके परिजन लंबे इलाज के कारण तनाव और चिंता से गुजरते हैं। ऐसे माहौल को हल्का बनाने के लिए डू-कर्मा वेलफेयर फाउंडेशन के 12 से 15 युवा स्वयंसेवक हर सप्ताह अस्पताल पहुंचकर बच्चों के साथ रचनात्मक गतिविधियां आयोजित करते हैं। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, इंजीनियर, व्यवसायी और मेडिकल के छात्र भी शामिल हैं।
स्वयंसेवक शुभम चौधरी बताते हैं कि शुरुआत में कई बच्चे ऑपरेशन के दर्द और अस्पताल के माहौल के कारण उदास रहते थे। लेकिन जैसे ही उनके हाथों में रंग और ब्रश आए, उनका ध्यान दर्द से हटकर रचनात्मकता की ओर चला गया। बच्चे खुद पेंटिंग शीट और रंग मांगने लगे। वहीं, अपने बच्चों को मुस्कुराते देख परिजनों का तनाव भी काफी कम हुआ और वे भी बच्चों के साथ रंग भरने लगे।
अस्पताल में कई भावुक पल भी सामने आए। बिहार से आई एक बच्ची ने स्वयंसेवकों से रंग अपने पास छोड़ने की गुजारिश की ताकि वह बाद में भी चित्र बना सके। वहीं, एक बच्चे की कार की पेंटिंग देखकर जब उसे भविष्य में कार चलाने का सपना दिखाया गया, तो उसके परिजनों ने भावुक होकर कहा कि फिलहाल उनकी सबसे बड़ी उम्मीद बच्चे का स्वस्थ होकर बड़ा होना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संगीत, चित्रकला, नृत्य, खेल और योग जैसी गतिविधियां शरीर में डोपामिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एंडॉर्फिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ के स्तर को बढ़ाती हैं। इससे तनाव और डर कम होता है, दर्द सहने की क्षमता बढ़ती है और मरीजों की रिकवरी बेहतर होती है। कई मामलों में बच्चों को दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता भी कम पड़ती है और उनकी नींद व मानसिक स्थिति में सुधार देखने को मिलता है।
अस्पताल की यह पहल यह संदेश देती है कि उपचार केवल दवाओं से नहीं, बल्कि प्यार, संवेदनशीलता और सकारात्मक माहौल से भी प्रभावी बनता है। बच्चों की मुस्कान ही उनके स्वस्थ भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद बन रही है।


