पटना। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का रोमांच चरम पर पहुँच गया है। चुनावी विश्लेषक मान रहे थे कि बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ ‘अभिषेक बंटी’ का पत्ता कटना सिर्फ एक सामान्य डैमेज कंट्रोल था, लेकिन अब जो कहानी सामने आई है उसने सबके होश उड़ा दिए हैं।कहा जा रहा है कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने बीजेपी को इस चुनाव से ही आउट करने के लिए एक डेडली ‘पेपर बम’ (दस्तावेजों का पुलिंदा) तैयार किया था। लेकिन एन वक्त पर पीके की टीम के ही किसी ‘विभीषण’ ने यह सीक्रेट प्लानिंग लीक कर दी और बीजेपी को समय रहते संजीवनी मिल गई।
क्या था प्रशांत किशोर का ‘पेपर बम’ प्लान
सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रशांत किशोर ने इससे पहले सम्राट चौधरी और मंगल पांडेय जैसे कद्दावर नेताओं के खिलाफ ‘पेपर बम’ फोड़कर उनके होश उड़ाए थे। बांकीपुर में भी पीके की व्यूह रचना बेहद खतरनाक थी:प्लानिंग क्या थी? पीके का प्लान था कि नामांकन वापसी की तारीख खत्म होने का इंतजार किया जाए। जैसे ही नाम वापसी का समय खत्म होता, पीके एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते और अभिषेक बंटी के काले चिट्ठे वाले ‘पेपर बम’ को ब्लास्ट कर देते।रणनीतिक दांव इन पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर अभिषेक बंटी का नामांकन रद्द होना तय था। चूंकि नाम वापसी और नए नामांकन का समय निकल चुका होता, इसलिए बीजेपी बिना किसी उम्मीदवार के चुनाव से ही आउट हो जाती और उसे किसी निर्दलीय को समर्थन देना पड़ता।
कैसे लीक हुई प्लानिंग और कैसे बची BJP
प्रशांत किशोर की इस बेहद गोपनीय रणनीति में जन सुराज के ही किसी अंदरूनी सूत्र (विभीषण) ने सेंध लगा दी। पीके के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से पहले ही यह खबर बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकारों तक पहुँच गई। सूचना मिलते ही बीजेपी खेमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में फजीहत से बचने के लिए अभिषेक बंटी का नामांकन वापस कराकर, उनकी जगह कंकड़बाग मंडल के अध्यक्ष नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।
‘पेपर बम’ के अंदर क्या था? (वो 3 बड़े खुलासे जो बंटी को डुबाने वाले थे)
हालांकि प्रशांत किशोर खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी आधिकारिक जानकारी देने वाले हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस ‘पेपर बम’ में अभिषेक बंटी को घेरने वाले 3 बड़े दस्तावेज शामिल थे:
- अपराधिक मामले छिपाना: अभिषेक बंटी पर मारपीट और छेड़खानी जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। आरोप है कि उन्होंने नामांकन पत्र (हलफनामे) में इस अहम सूचना को छिपाया था।
- फर्जी या संदिग्ध डिग्री: हलफनामे में उन्होंने मैट्रिक पास होने की जानकारी दी थी। लेकिन जांच में पता चला कि यह डिग्री बिहार बोर्ड, सीबीएसई या आईसीएसई की नहीं, बल्कि संस्कृत बोर्ड की थी, जिसमें कई कानूनी विसंगतियां और झोल थे।
- पिता का ‘चारा घोटाला’ कनेक्शन: बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद सिन्हा ‘मेसर्स मगध केमिकल्स कॉर्पोरेशन’ नाम की कंपनी में मैनेजर थे। यह कंपनी चारा घोटाले में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों की हेराफेरी में दोषी पाई गई थी और उनके पिता पर कोर्ट द्वारा 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
बांकीपुर का सियासी गणित बदला
बीजेपी ने ऐन वक्त पर नया उम्मीदवार उतारकर प्रशांत किशोर के इस चक्रव्यूह को तो भेद दिया है, लेकिन पीके की इस आक्रामक घेराबंदी ने यह साफ कर दिया है कि जन सुराज इस उपचुनाव को कितनी गंभीरता से लड़ रही है। अब बांकीपुर की जनता 30 जुलाई को ईवीएम का बटन दबाकर तय करेगी कि ‘पेपर बम’ के इस खेल में बाजी किसके हाथ लगती है।


