Monday, July 13, 2026

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मिडिल-ईस्ट में महायुद्ध: अमेरिका का ईरान पर भीषण हमला, 14 प्रांतों में मची तबाही

दुबई/वाशिंगटन: मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब एक भीषण सैन्य टकराव में बदल चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार और सोमवार की रात ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी हवाई हमलों (Air Strikes) की सीरीज़ शुरू की है। लेबनानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के 14 अलग-अलग प्रांतों को निशाना बनाया है।

IRGC के स्पीडबोट्स और 140 से ज्यादा सैन्य ठिकाने तबाह

अमेरिकी सेना ने यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार:ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की मिलिट्री स्पीडबोट्स, मिसाइल और ड्रोन साइट्स, गोला-बारूद के डिपो और सर्विलांस सिस्टम को निशाना बनाया गया है।अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों—बंदर अब्बास, केशम द्वीप (Qeshm Island), जास्क, सिरीक और बुशहर में सिलसिलेवार भीषण धमाके सुने गए।एक स्थानीय हवाई अड्डे और वाटर पंपिंग स्टेशन पर हुए हमलों में नुकसान की खबरें हैं, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है।

ईरान का पलटवार: कतर, ओमान और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

अमेरिका के इस चौतरफा हमले से बौखलाए ईरान ने भी चुप न बैठने का फैसला किया। ईरान की ‘नूर न्यूज एजेंसी’ के मुताबिक, IRGC और ईरानी सेना ने मिडिल-ईस्ट के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US Bases) को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन दागे हैं।

  • खाड़ी देशों में अलर्ट: ईरान ने कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए।
  • एयर डिफेंस एक्टिव: कुवैत और कतर की सेनाओं ने ईरान से आ रही कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। वहीं, ओमान ने इन हमलों के विरोध में ईरानी राजदूत को तलब कर इसे बेहद ‘गैर-जिम्मेदाराना’ हरकत बताया है।
होर्मुज जलमार्ग पर कब्जे की जंग

इस पूरे युद्ध की मुख्य वजह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।

  • ईरान का दावा: ईरान का कहना है कि इस समुद्री मार्ग पर उसका पूरा नियंत्रण है और वह यहां से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूलने या उनकी आवाजाही को रोकने का अधिकार रखता है।
  • अमेरिका का रुख: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि “इस जलमार्ग पर ईरान का कोई मालिकाना हक नहीं है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जहाजों की सुरक्षित आवाजाही (Freedom of Navigation) को बनाए रखने के लिए अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।”
वैश्विक चिंता और संयुक्त राष्ट्र (UN) की अपील

लगातार तीन दिनों से चल रहे इस आमने-सामने के युद्ध ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से तुरंत युद्ध रोकने और शांति वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की है, क्योंकि इस टकराव से पूरे मिडिल-ईस्ट में एक बड़ी तबाही का खतरा मंडरा रहा है।

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