ग्लासगो/पटना। कभी परिवार का पेट भरने के लिए सब्जियां बेचीं, कभी रोजी-रोटी के लिए ई-रिक्शा चलाया और बचपन में पोलियो जैसी गंभीर चुनौती का सामना किया। लेकिन हौसलों की उड़ान इतनी ऊंची थी कि तमाम मुश्किलें भी उनके कदम नहीं रोक सकीं। बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का पदक खाता खोल दिया और अपने संघर्ष को सफलता की नई मिसाल में बदल दिया।स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन झंडू कुमार ने पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह भारत का इन खेलों में पहला पदक है, जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया।
181 और 190 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाकर जीता ब्रॉन्ज
झंडू कुमार ने प्रतियोगिता में 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और कुल 130.9 अंक हासिल किए। अंतिम प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन उन्हें कांस्य पदक दिलाने के लिए पर्याप्त रहा।इस स्पर्धा में नाइजीरिया के रिलवान इड्रिस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग 131.0 अंक के साथ रजत पदक हासिल करने में सफल रहे। भारत के एक अन्य खिलाड़ी सुधीर 114.1 अंकों के साथ छठे स्थान पर रहे।
‘ऐसा लग रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं’
ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद झंडू कुमार की खुशी शब्दों में बयां नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा, “आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं। यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ पदक है। मेरे मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि किसी भी कीमत पर देश के लिए मेडल जीतना है।”
5 साल की उम्र में पोलियो, फिर भी नहीं मानी हार
झंडू कुमार बिहार के नालंदा जिले के हरनौत बाजार के रहने वाले हैं। महज पांच वर्ष की उम्र में वह पोलियो की चपेट में आ गए थे। शारीरिक चुनौती के साथ-साथ आर्थिक तंगी ने भी उनका बचपन कठिन बना दिया। परिवार की मदद करने और अपने खेल का खर्च उठाने के लिए उन्होंने सब्जियां बेचीं और ई-रिक्शा तक चलाया।खेल के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया, ताकि प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का खर्च जुटाया जा सके।
पैरा एथलेटिक्स से पावरलिफ्टिंग तक का सफर
झंडू ने अपने खेल करियर की शुरुआत पैरा एथलेटिक्स से की थी, जहां उन्होंने शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में जिला और राज्य स्तर पर कई पदक जीते। वर्ष 2022 में अपने कोच की सलाह पर उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग में कदम रखा और कोलकाता में आयोजित पहले ही टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।इसके बाद उन्होंने लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ। वर्ष 2025 में 72 किलोग्राम वर्ग में 205 और फिर 206 किलोग्राम वजन उठाकर दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने वर्ल्ड कप और एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते, जबकि विश्व चैंपियनशिप में शीर्ष-6 खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
झंडू कुमार की कहानी केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और अटूट विश्वास की मिसाल है। गरीबी, शारीरिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। ग्लासगो में जीता गया यह कांस्य पदक न केवल भारत के लिए पहला पदक है, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी बन गया है।


