रायपुर। झीरम घाटी मामले में विशेष NIA अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से फैसले को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस नेताओं पर मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। इसके जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि जिनके परिवार के लोगों ने इस तरह की घटना नहीं झेली, वे पीड़ित परिवारों के दर्द को पूरी तरह महसूस नहीं कर सकते।
झीरम मामले में 16 सितंबर को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाते हुए आगे कानूनी लड़ाई की बात कही है, जबकि भाजपा नेताओं ने अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण बताया है।
अरुण साव बोले- कांग्रेस केवल राजनीति कर रही
झीरम मामले को लेकर कांग्रेस की बैठक और नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा। उन्होंने बघेल के पुराने बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि वे लंबे समय तक यह कहते रहे कि झीरम का सच उनकी जेब में है, लेकिन जांच के दौरान वह सामने नहीं आया।
अरुण साव ने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल झीरम मामले को लेकर लगातार राजनीति करते रहे। उनका कहना है कि यदि किसी के पास मामले से संबंधित ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के सामने रखा जाना चाहिए। फैसले के बाद भी कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों को लेकर भाजपा नेताओं ने इसी बात को दोहराया है।
भूपेश बघेल का पलटवार- हमने अपने बड़े नेताओं को खोया है
अरुण साव के बयान पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने झीरम हमले में अपने कई बड़े नेताओं को खोया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने परिवार में ऐसी त्रासदी नहीं झेली है, वे उस दर्द को महसूस नहीं कर सकते।
बघेल ने कहा कि झीरम मामले में कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं को खोया है और इस वजह से पार्टी के लिए यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने साव के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस घटना का दर्द वही परिवार समझ सकते हैं, जिन्होंने अपने लोगों को खोया है।
कवासी लखमा को लेकर भी उठे सवाल
झीरम मामले की जांच में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि NIA ने मामले की विस्तृत जांच की है और बड़ी संख्या में लोगों के बयान एवं साक्ष्य दर्ज किए गए हैं।
साव के मुताबिक जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे चार्जशीट में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े तथ्यों को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
वहीं कांग्रेस की ओर से NIA की जांच को लेकर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने जांच के दायरे और मामले में कथित तौर पर छूटे पहलुओं को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक की हैं।
झीरम फैसले के बाद आगे बढ़ेगी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई
झीरम मामले में अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने अपनी आगे की रणनीति को लेकर बैठक भी की है। पार्टी ने आलाकमान से चर्चा करने, दिल्ली में पीड़ित परिवारों और वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने तथा मामले में आगे न्यायिक लड़ाई लड़ने की बात कही है।
वहीं भाजपा नेताओं की ओर से कांग्रेस से यह सवाल किया जा रहा है कि यदि उसके पास जांच से संबंधित कोई अतिरिक्त साक्ष्य या तथ्य हैं, तो उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस तरह अदालत के फैसले के बाद झीरम मामला एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
बांग्लादेशी जांच को लेकर भी साव का बयान
बिलासपुर में संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की जांच के सवाल पर अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पुलिस को जो संदिग्ध लगा, उसके आधार पर जांच की जा रही थी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
साव ने कहा कि यदि जांच में संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो केवल नागरिक होने के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे को लेकर बेवजह आरोप लगाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस अनुशासन समिति पर भी साधा निशाना
कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक को लेकर भी अरुण साव ने कांग्रेस पर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में नेताओं को बाहर करने और फिर वापस शामिल करने की प्रक्रिया चलती रहती है।
साव ने कांग्रेस की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में नियम और संविधान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और उनके मुताबिक पार्टी एक परिवार के इर्द-गिर्द चलती है। ये भाजपा नेता अरुण साव के राजनीतिक आरोप हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अलग प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
झीरम फैसले के बाद दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक ओर कांग्रेस फैसले के बाद आगे न्यायिक लड़ाई की तैयारी कर रही है, वहीं भाजपा अदालत के फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम बताते हुए कांग्रेस से जांच से जुड़े साक्ष्य सामने रखने की मांग कर रही है।


