चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की वित्त मंत्री मैरी विल्सन की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगने वाली याचिका पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं है और अदालत की प्रक्रिया सभी के लिए समान रूप से लागू होती है।
विधानसभा सत्र का दिया गया हवाला
मंत्री की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विधानसभा का सत्र चल रहा है, इसलिए मैरी विल्सन को व्यक्तिगत पेशी से राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और व्यक्तिगत पेशी से छूट देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सार्वजनिक पद पर होना न्यायिक प्रक्रिया से अलग होने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जनप्रतिनिधियों को भी कानून और न्यायिक प्रक्रिया का उसी तरह पालन करना होगा, जैसा अन्य लोगों को करना पड़ता है।
2022 के मारपीट मामले से जुड़ा है विवाद
यह मामला वर्ष 2022 में सामने आए कथित मारपीट के आरोपों से जुड़ा है। मैरी विल्सन पर अपने भाई और भाभी के साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए थे। इसी मामले में अदालत में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर कार्यवाही चल रही है।
मंत्री की ओर से पेशी से छूट की मांग किए जाने पर हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने पुराने उदाहरणों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि इससे पहले भी महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर रह चुके नेता अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से पेश हो चुके हैं। ऐसे में केवल जनप्रतिनिधि होने या विधानसभा सत्र में व्यस्त होने के आधार पर अदालत में व्यक्तिगत पेशी से स्थायी राहत नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने अपने रुख के जरिए यह संदेश दिया कि न्यायिक प्रक्रिया के सामने पद और राजनीतिक हैसियत को आधार बनाकर विशेष छूट की मांग नहीं की जा सकती।


