Wednesday, September 23, 2026

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अजय चंद्राकर का बड़ा कदम सुप्रिया श्रीनेत और नेहा राठौर के खिलाफ आपराधिक मानहानि परिवाद

धमतरी। छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त को ध्वजारोहण से जुड़े वायरल वीडियो का विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। कुरूद से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का परिवाद न्यायालय में पेश किया है। मंगलवार को अजय चंद्राकर धमतरी सत्र न्यायालय पहुंचे। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

अजय चंद्राकर का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य शासन की ओर से उन्हें निर्धारित कार्यक्रम में अतिथि के रूप में ध्वजारोहण के लिए आमंत्रित किया गया था और उन्होंने सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। विवाद उस वीडियो को लेकर है, जिसमें उन्हें भाजपा का झंडा फहराते हुए देखा गया। चंद्राकर के अनुसार, यह वीडियो 15 अगस्त का नहीं बल्कि मार्च 2026 में आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम का है।

उपलब्ध फैक्ट-चेक रिपोर्टों के मुताबिक भी वायरल वीडियो 15 अगस्त 2026 का नहीं, बल्कि कुरूद में मार्च में हुए भाजपा प्रशिक्षण कार्यक्रम का है। वीडियो को स्वतंत्रता दिवस के दिन सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ साझा किया गया कि भाजपा नेताओं ने तिरंगे की जगह पार्टी का झंडा फहराया। इस मामले में पुलिस पहले ही सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर समेत कुछ अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है।

अजय चंद्राकर का आरोप है कि पुराने वीडियो को अलग संदर्भ में प्रस्तुत कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया है। उनके अधिवक्ता विशाल शुक्ला के मुताबिक, परिवाद में आपराधिक मानहानि के तहत कार्रवाई और सजा की मांग की गई है, जबकि आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग नहीं की गई है।

अधिवक्ता ने बताया कि परिवाद के साथ मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। अब न्यायालय उपलब्ध सामग्री और आरोपों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा। मानहानि का आरोप लगाया जाना अपने आप में दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं है और मामले में न्यायालय की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 15 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो से हुई थी, जिसमें अजय चंद्राकर भाजपा का झंडा फहराते दिखाई दे रहे थे। वीडियो को स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर कई सोशल मीडिया पोस्ट किए गए थे। बाद में विभिन्न फैक्ट-चेक रिपोर्टों में वीडियो को मार्च में हुए भाजपा प्रशिक्षण कार्यक्रम का बताया गया। पुलिस ने भी वीडियो के स्रोत और सोशल मीडिया पर उसके प्रसार से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की थी।

अब अजय चंद्राकर की ओर से दायर मानहानि परिवाद के बाद यह विवाद एक और कानूनी चरण में पहुंच गया है। न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद पर सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

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