पटना। बिहार की राजनीति में इस वक्त सबसे सनसनीखेज खबर पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट से आ रही है। जहाँ उपचुनाव के ठीक पहले बीजेपी खेमे में ऐसा ‘खेला’ हुआ है, जिसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बीजेपी के घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ ‘अभिषेक बंटी’ ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया है।
कैमरों के सामने तो अभिषेक बंटी ने ‘पारिवारिक कारणों’ का रोना रोया है, लेकिन इस इस्तीफे के पीछे की जो ‘कड़वी हकीकत’ अंदरखाने से छनकर बाहर आई है, उसने बीजेपी नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा दी थी।
इनसाइड स्टोरी: …जब ‘अतीत के पन्नों’ से निकला ‘चारा घोटाले’ का जिन्न
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही बीजेपी ने अभिषेक बंटी के नाम का एलान किया, विपक्षी खेमे ने उनके बैकग्राउंड को खंगालना शुरू कर दिया। इसी दौरान बंटी के परिवार से जुड़ा एक ऐसा राजफाश हुआ, जिसने बीजेपी आलाकमान को सख्ते में डाल दिया:
- पिता की कंपनी पर दाग: जांच में सामने आया कि अभिषेक बंटी के पिता रवींद्र प्रसाद सिन्हा की एक कंपनी का नाम बिहार के सबसे चर्चित और बदनाम ‘चारा घोटाले’ में शामिल था।
- करोड़ों की हेराफेरी का आरोप: आरोप है कि इस कंपनी ने चारा घोटाले के दौरान फर्जी बिलों के दम पर अवैध सप्लायर की भूमिका निभाई और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की भारी हेराफेरी की थी।
‘जीरो टॉलरेंस’ वाली BJP का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या डर?
बिहार में इस वक्त लालू प्रसाद यादव की आरजेडी, कांग्रेस और प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ जैसी पार्टियां बीजेपी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं।
रणनीति के पीछे की वजह बीजेपी नेतृत्व को यह साफ आभास हो गया था कि अगर अभिषेक बंटी मैदान में रहे, तो विपक्ष ‘चारा घोटाला’ और ‘भ्रष्टाचार’ को सबसे बड़ा हथियार बना लेगा। जो बीजेपी आरजेडी पर चारा घोटाले को लेकर हमेशा हमलावर रहती है, वह खुद इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ जाती। इसी महा-फजीहत और बड़े राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए आलाकमान के सीधे आदेश पर बंटी का पत्ता साफ कर दिया गया।
डैमेज कंट्रोल: 32 साल के युवा चेहरे पर दांव
बांकीपुर सीट पर किसी भी तरह के रिस्क से बचते हुए बीजेपी ने तुरंत ‘डैमेज कंट्रोल’ मोड ऑन किया। बंटी का इस्तीफा होते ही पार्टी ने 32 साल के युवा और बेदाग नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया है।
काउंटडाउन शुरू: याद रखिए ये तारीखें
बांकीपुर का रण अब बेहद दिलचस्प हो चुका है और उल्टी गिनती शुरू हो गई है:
- 13 जुलाई: नामांकन का आखिरी मौका (बीजेपी ने ठीक दो दिन पहले पासा पलटा)
- 30 जुलाई: जनता करेगी फैसला (वोटिंग)
- 03 अगस्त: नतीजे बताएंगे कि बीजेपी का यह दांव कितना सही था!
सियासी पंडितों का कहना है कि बीजेपी ने ऐन वक्त पर उम्मीदवार बदलकर विपक्ष के हाथ से उनका सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र छीन लिया है। अब देखना यह है कि नए उम्मीदवार नीरज सिन्हा इस सियासी तूफान के बीच बांकीपुर में कमल खिला पाते हैं या नहीं!


