Saturday, July 11, 2026

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अल नीनो का बढ़ता खतरा: भारत के 315 जिलों पर सूखे की आशंका, दुनिया में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: दुनिया इस समय भीषण गर्मी और बदलते मौसम की मार झेल रही है। यूरोप से लेकर एशिया तक तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। फ्रांस में गर्मी से 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों में भी हीटवेव ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने चेतावनी दी है कि अल नीनो पहले से गर्म होती दुनिया में “आग में घी” का काम करेगा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर के बढ़ते तापमान के कारण अल नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है, जिससे आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में मौसम और अधिक चरम हो सकता है।

भारत में भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 1 से 27 जून के बीच देश में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जहां इस अवधि में औसतन 141.8 मिमी वर्षा होती है, वहीं इस वर्ष केवल 80.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

इसी बीच, कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संयुक्त आकलन में देश के 315 जिलों में कम वर्षा और सूखे की आशंका जताई गई है। इनमें 111 जिले ऐसे हैं, जहां सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से भी कम है, जिससे फसलों पर सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार ने संभावित रूप से प्रभावित जिलों की पहचान कर राज्यों को अलर्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में खेती या रोजगार प्रभावित होगा, वहां जरूरत पड़ने पर ग्रामीण रोजगार योजनाओं के माध्यम से लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सूखे की आशंका वाले जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित 12 राज्यों में स्थित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन, जल संकट और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार, किसान और आम जनता—सभी को मौसम की इस चुनौती के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है।

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