रायपुर, 17 जुलाई। छत्तीसगढ़ में जबरन, प्रलोभन, धोखाधड़ी और दबाव के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 अब प्रभावी हो गया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए केवल अवैध और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया है। यह नया कानून वर्ष 1968 के पुराने अधिनियम की जगह लागू किया गया है और इसमें पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर दंड और विस्तृत कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं।सरकार के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बल, प्रलोभन, कपट, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव या किसी अन्य अवैध तरीके से धर्मांतरण कराता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानून में विशेष रूप से महिलाओं, नाबालिगों, दिव्यांगों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर वर्गों के धर्मांतरण को गंभीर अपराध माना गया है। सामूहिक धर्मांतरण जैसे मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा कम से कम 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जिसे देश के सबसे कठोर धर्मांतरण विरोधी प्रावधानों में गिना जा रहा है।
शादी के नाम पर धर्मांतरण पर भी सख्ती
नए कानून में विवाह से जुड़े मामलों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन केवल विवाह के उद्देश्य से कराया जाता है या विवाह को धर्मांतरण का माध्यम बनाया जाता है, तो ऐसे मामलों में विवाह को कानूनी जांच के दायरे में लाया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य अंतरधार्मिक विवाहों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि धोखे या दबाव के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
धर्म परिवर्तन के लिए तय होगी कानूनी प्रक्रिया
कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। संबंधित व्यक्ति को जिला प्रशासन के समक्ष आवश्यक घोषणा देनी होगी, जिसके बाद नियमानुसार जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सरकार का दावा है कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से हो रहा है और उसमें किसी प्रकार का दबाव, लालच या धोखाधड़ी शामिल नहीं है।
सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कानून लागू होने के दौरान कहा था कि राज्य में गरीब, अशिक्षित और कमजोर वर्गों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। उनके अनुसार पुराना कानून वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त प्रभावी नहीं था, इसलिए नया और अधिक सशक्त कानून लाया गया है, जिससे ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की आपत्तियां
दूसरी ओर, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक एवं मानवाधिकार संगठनों ने कानून के कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कानून का क्रियान्वयन इस प्रकार होना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता और स्वेच्छा से धर्म अपनाने के अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सरकार का कहना है कि कानून का उद्देश्य केवल अवैध और जबरन धर्मांतरण को रोकना है, न कि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना।


