रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा के नए संगठनात्मक प्रभारी की नियुक्ति के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं, सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्ति भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल के तहत की गई है।
स्मृति ईरानी की नियुक्ति पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने तंज कसा है। उन्होंने स्मृति ईरानी को लेकर कहा कि उनका “वनवास खत्म हुआ है” और वह “चोट खाई हुई” तथा “घायल शेरनी” हैं। बघेल ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ आने के बाद वह किसे हटाती हैं, यह देखना होगा।
‘स्मृति ईरानी का वनवास खत्म हुआ’
भूपेश बघेल ने स्मृति ईरानी की नई जिम्मेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “स्मृति ईरानी का वनवास खत्म हुआ है। चोट खाई हुई स्मृति ईरानी हैं, घायल शेरनी हैं। यहां आने के बाद किसको हटाती हैं, यह देखना होगा।”
उनके इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी का एक और दौर शुरू हो गया है। हालांकि, स्मृति ईरानी को मिली जिम्मेदारी मुख्य रूप से भाजपा के संगठनात्मक कामकाज और राज्य इकाई के साथ समन्वय से जुड़ी है।
सिलेंडर के मुद्दे पर भी साधा निशाना
भूपेश बघेल ने स्मृति ईरानी के पुराने राजनीतिक मुद्दों का जिक्र करते हुए एलपीजी सिलेंडर की कीमत को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्मृति ईरानी सिलेंडर लेकर बैठी थीं और मोदी गारंटी के तहत 500 रुपये में सिलेंडर देने की बात कही गई थी।
बघेल की इस टिप्पणी को भाजपा की चुनावी गारंटी और महंगाई के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बयान के जरिए उन्होंने स्मृति ईरानी की पुरानी राजनीतिक छवि और भाजपा के चुनावी वादों पर सवाल उठाने की कोशिश की।
छत्तीसगढ़ BJP को मिली नई संगठनात्मक टीम
भाजपा ने हालिया संगठनात्मक फेरबदल में स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ के साथ-साथ हरियाणा का भी प्रभारी बनाया है। सिद्धार्थ शंभू को छत्तीसगढ़ का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी की भूमिका में केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच समन्वय, संगठनात्मक कार्यक्रमों की निगरानी और पार्टी के कामकाज की समीक्षा जैसे दायित्व शामिल होते हैं।
अब स्मृति ईरानी के नए प्रभार संभालने के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका और कांग्रेस की ओर से होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।

