नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को लेकर जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उर्वरक (खाद) और कच्चे माल से लदे करीब 10 से 12 जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। इससे देश में संभावित खाद संकट टलता नजर आ रहा है और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होने की उम्मीद बढ़ गई है।
कुछ दिन पहले तक भारत आने वाले 16 जहाज होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए थे। इनमें यूरिया, डीएपी, अमोनिया और सल्फर जैसी महत्वपूर्ण कृषि सामग्रियां लदी थीं। लेकिन हालिया घटनाक्रम में अधिकांश जहाजों के निकल जाने से आपूर्ति को लेकर बनी चिंता काफी हद तक कम हो गई है।
- किन-किन सामानों से लदे थे जहाज?
- 8 जहाज यूरिया से लदे थे
- 4 जहाज डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) लेकर आ रहे थे
- 1 जहाज अमोनिया से भरा था
- 3 जहाज सल्फर लेकर भारत के लिए रवाना हुए थे
- खरीफ सीजन से पहले मिली राहत
जून से शुरू होने वाले खरीफ बुवाई सीजन में खाद की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे समय में इन जहाजों का भारत पहुंचना कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया भारत के लिए उर्वरकों और उनके कच्चे माल का प्रमुख स्रोत है, इसलिए होर्मुज में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ सकता था।
- कीमतों में भी मिल सकती है राहत
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जहाजों की आवाजाही आगे भी जारी रहती है तो अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों पर दबाव कम होगा और आने वाले महीनों में किसानों को सस्ती खाद मिल सकती है। यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी के शुरुआती संकेत भी मिलने लगे हैं।
- सरकार की तैयारी भी रंग लाई
संकट के दौरान भारत सरकार ने अतिरिक्त एलएनजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर यूरिया खरीद के लिए कई टेंडर जारी किए थे। सरकार का कहना है कि वर्तमान खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ा खतरा नहीं है।
निष्कर्ष: होर्मुज क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद खाद से लदे अधिकांश जहाजों का सुरक्षित निकल जाना भारत के लिए बड़ी राहत है। इससे न केवल किसानों की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद बढ़ी है, बल्कि खाद की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना भी मजबूत हुई है।


