नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार और रुपये को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, विदेशी पूंजी का बढ़ता प्रवाह और घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती आने वाले समय में भारतीय वित्तीय बाजारों को सपोर्ट कर सकती है।
क्रेडिट ग्रोथ से अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में घरेलू बैंकिंग क्रेडिट की वृद्धि मजबूत बनी हुई है। जेफरीज के आकलन के अनुसार, घरेलू लेंडिंग ग्रोथ करीब 17-18 प्रतिशत सालाना की रफ्तार से बढ़ रही है, जिसमें कॉरपोरेट लोन के साथ कृषि और रिटेल क्रेडिट की भी अहम भूमिका है।
मजबूत क्रेडिट ग्रोथ को आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों की फंडिंग जरूरतों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे बाजार में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।
विदेशी पूंजी की वापसी से बाजार को राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी बेहतर हुआ है। जुलाई में भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 2.12 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया। हालांकि, साल की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी अभी भी काफी अधिक है।
इसके अलावा विदेशी बॉन्ड निवेश और आरबीआई की विदेशी मुद्रा जुटाने वाली योजनाओं से भी रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
रुपये के आउटलुक में सुधार
पूंजी प्रवाह बढ़ने और घरेलू आर्थिक स्थिति मजबूत रहने से भारतीय रुपये के आउटलुक में भी सुधार के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया मई में 96.96 प्रति डॉलर के निचले स्तर से सुधरकर 31 जुलाई तक करीब 95.17 प्रति डॉलर पर आ गया था।
हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की धारणा अभी भी भारतीय बाजारों के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, मजबूत घरेलू क्रेडिट ग्रोथ और पूंजी प्रवाह में सुधार भारतीय बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं और आने वाले समय में निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूती मिल सकती है।


