मुंबई। महाराष्ट्र में ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं को मंजूरी देने के फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर रैपिडो, ओला और उबर जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को मंजूरी देने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर असर का दावा
संजय राउत ने अपने पत्र में कहा कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने पर निर्भर हैं। उनके मुताबिक, बाइक टैक्सी सेवाओं के विस्तार से इन ऑटो चालकों की आय और रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है।
राउत ने सरकार से मांग की है कि बाइक टैक्सी को अनुमति देने से पहले मौजूदा ऑटो-रिक्शा चालकों और उनके परिवारों की आजीविका को ध्यान में रखा जाए।
संजय निरुपम ने भी उठाया ऑटो चालकों का मुद्दा
वहीं, नेता संजय निरुपम ने भी ऑटो-रिक्शा चालकों से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने मराठी भाषा को लेकर ऑटो चालकों पर की जा रही कार्रवाई और लाइसेंस-परमिट रद्द करने की प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण बताया है।
निरुपम ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से बातचीत करेंगे और ऑटो चालकों की समस्याओं को उनके सामने रखेंगे।
बाइक टैक्सी और ऑटो चालकों को लेकर बढ़ी सियासी बहस
बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर एक तरफ ऐप आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात है, तो दूसरी ओर ऑटो चालकों की रोजी-रोटी और रोजगार सुरक्षा का मुद्दा उठ रहा है। संजय राउत और संजय निरुपम के बयानों के बाद महाराष्ट्र में यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

