अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एक तीन वर्षीय मासूम की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्चे के इलाज के दौरान एक्सपायरी इंजेक्शन लगाए गए, जिसके बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की।
जांच में मिले तीन एक्सपायरी इंजेक्शन
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिद्धार्थ हॉस्पिटल की फार्मेसी, दवाइयों के स्टॉक, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान टीम को तीन एक्सपायरी इंजेक्शन मिले। इनमें Amikacin 250 mg भी शामिल है, जिसकी एक्सपायरी डेट अप्रैल 2026 दर्ज है।
जांच टीम ने इन दवाइयों के सैंपल भी एकत्र किए हैं। हालांकि, बरामद एक्सपायरी इंजेक्शनों में से किसी इंजेक्शन का इस्तेमाल संबंधित मासूम के इलाज में किया गया था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मासूम की हालत बिगड़ने का परिजनों का आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। बच्चे की हालत गंभीर होने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले में कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
फिलहाल बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय रिपोर्ट सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दवाइयों के सैंपल की जांच कर रहा है।
सीएमएचओ ने जांच की पुष्टि की
सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को ने मामले में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मिले एक्सपायरी इंजेक्शनों के सैंपल लिए गए हैं। अस्पताल के दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अप्रैल 2026 में एक्सपायर दवा स्टॉक में कैसे रही?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं के स्टॉक में मौजूद रहने को लेकर उठ रहा है। यदि किसी इंजेक्शन की एक्सपायरी अप्रैल 2026 में हो चुकी थी, तो उसके बाद भी वह अस्पताल की फार्मेसी में कैसे मौजूद रहा? क्या दवाइयों के स्टॉक की नियमित जांच की जा रही थी? और क्या बरामद इंजेक्शनों में से किसी का इस्तेमाल बच्चे के इलाज में किया गया था?
इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच और सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल विभाग ने जांच शुरू कर दी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।


