Friday, July 10, 2026

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नया रायपुर के नक्ती गांव में बुलडोजर कार्रवाई से मचा बवाल, 85 से अधिक घर ध्वस्त करणी सेना ने पुनर्वास की मांग उठाई

रायपुर/नया रायपुर, 2 जुलाई 2026। नया रायपुर के नक्ती गांव में प्रशासन द्वारा की गई बड़े पैमाने की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद इलाके में विवाद और विरोध तेज हो गया है। मंगलवार सुबह भारी पुलिस सुरक्षा के बीच प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की सहायता से 85 से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना बेघर कर दिया गया।

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल, नगर निगम, राजस्व विभाग, एसडीआरएफ तथा अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे थे और यहां उन्हें बिजली, पानी, सड़क, स्कूल तथा अन्य सरकारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं।

प्रभावित परिवारों में नाराजगी

बुलडोजर कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि बारिश के मौसम में उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर कर दिया गया। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया।

करणी सेना ने जताया विरोध

क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा समाजसेवी वीरेंद्र सिंह तोमर ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि किसी भी विकास कार्य से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि लगातार कई दिनों से प्रभावित लोग सहायता और न्याय की मांग लेकर उनके पास पहुंच रहे थे। उनका कहना है कि यदि किसी घटना से बड़ी संख्या में गरीब और आम नागरिक प्रभावित होते हैं, तो समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति का दायित्व है कि वह उनके साथ खड़ा हो।

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वीरेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि बारिश के मौसम में गरीब परिवारों से उनका आशियाना छीनना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल पुनर्वास, रहने की व्यवस्था और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों के प्रमुख सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे वास्तव में अतिक्रमणकारी थे, तो वर्षों तक उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों दिया गया। उनका आरोप है कि अचानक अतिक्रमण घोषित कर घर तोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। साथ ही उन्होंने मांग की कि यदि भूमि किसी सरकारी परियोजना के लिए आवश्यक थी, तो पहले पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए था।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार नोटिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई है और इसका उद्देश्य सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना था। हालांकि, प्रभावित परिवारों द्वारा लगाए गए आरोपों और पुनर्वास संबंधी मांगों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

मामला अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय

नक्ती गांव की यह कार्रवाई अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गई है। एक ओर प्रशासन इसे अतिक्रमण हटाने की वैधानिक कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार और विभिन्न सामाजिक संगठन पुनर्वास के बिना की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन के आधिकारिक रुख और पुनर्वास संबंधी निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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