Thursday, August 27, 2026

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ढाका में भारत को लेकर तीखी बयानबाज़ी, सांसद नाहिद इस्लाम ने उठाई माफी की मांग; संसद में गरमाया राजनीतिक माहौल

बांग्लादेश की राजनीति में भारत को लेकर एक बार फिर तनावपूर्ण बयानबाज़ी देखने को मिली है। ढाका में संसद की कार्यवाही के दौरान नेशनल सिटीजन पार्टी के सांसद Nahid Islam ने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए माफी की मांग की है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है और यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

संसद में बजट चर्चा के दौरान उठा विवाद

यह मामला 2026-27 के प्रस्तावित राष्ट्रीय बजट पर संसद में हो रही चर्चा के दौरान सामने आया। 28 जून को हुई इस बहस में नाहिद इस्लाम ने भारत की विदेश नीति और बांग्लादेश के साथ उसके पुराने संबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina की सरकार का लंबे समय तक राजनीतिक समर्थन किया, जिसे उन्होंने “16 वर्षों का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप” बताया।

नाहिद इस्लाम ने कहा कि यदि भारत वास्तव में बांग्लादेश के साथ समानता और सम्मान के आधार पर संबंध चाहता है, तो उसे अतीत की नीतियों और कार्यों पर स्पष्टता देनी चाहिए और ढाका से माफी मांगनी चाहिए।

भारत के नए उच्चायुक्त पर टिप्पणी

सांसद ने भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के हालिया बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच “साझा आकाश और साझा धरती” जैसे सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन पुराने विवादों और तनावपूर्ण मुद्दों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

नाहिद इस्लाम के अनुसार, केवल कूटनीतिक भाषा से आगे बढ़कर वास्तविक मुद्दों पर बात करना जरूरी है, ताकि दोनों देशों के संबंध पारदर्शी और सम्मानजनक आधार पर आगे बढ़ सकें।

सीमा सुरक्षा और मानवाधिकार का मुद्दा

अपने भाषण में नाहिद इस्लाम ने सीमा सुरक्षा को लेकर भी भारत पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कई बार लोगों को अवैध बांग्लादेशी बताकर सीमा पार धकेला गया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर कथित रूप से कुछ नागरिकों की मौतें हुई हैं, जिन्हें वह गंभीर मानवाधिकार चिंता का विषय मानते हैं।

उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 10 बांग्लादेशी नागरिकों की मौत सीमा पर हो चुकी है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोनों देशों को इस मुद्दे पर गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए।

“बांग्लादेश फर्स्ट” नीति पर जोर

सांसद ने यह भी कहा कि देश की विदेश नीति को केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उनके अनुसार, बांग्लादेश सरकार को “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति को व्यवहार में लागू करना चाहिए और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को अधिक संतुलित और राष्ट्रीय हितों पर आधारित बनाना चाहिए।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह न केवल कूटनीतिक संबंध बनाए रखे, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे।

राजनीतिक असर और कूटनीतिक संकेत

इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी और कुछ अन्य राजनीतिक समूह इस मुद्दे को भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में बड़ा विषय बता रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों देशों के संबंधों में अस्थायी तनाव पैदा कर सकते हैं, खासकर तब जब क्षेत्रीय सहयोग और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिशें चल रही हों।

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