Saturday, July 25, 2026

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पंजाब कांग्रेस में कलह तेज: चन्नी-वड़िंग विवाद पर दिल्ली में मंथन, भूपेश बघेल ने हाईकमान को सौंपी रिपोर्ट

नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान अब दिल्ली तक पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान सक्रिय हो गया है। इसी सिलसिले में दिल्ली में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा शामिल हुए।बैठक में भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट केसी वेणुगोपाल को सौंपी। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष बदलने की संभावना से इनकार किया गया है, लेकिन पार्टी के अंदर नाराज नेताओं को साथ लाने और विवाद खत्म करने के विकल्पों पर चर्चा हुई।

‘अध्यक्ष बदलना गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं’: भूपेश बघेल

बैठक के बाद भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “अध्यक्ष बदलना गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है।” उन्होंने बताया कि पंजाब के सभी प्रमुख नेताओं से बातचीत की गई है और पूरी स्थिति की जानकारी हाईकमान को दे दी गई है।बघेल ने कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ने पर फोकस किया जा रहा है।

चन्नी गुट ने रखीं तीन बड़ी मांगें
  • इससे पहले 11 जुलाई को चरणजीत सिंह चन्नी गुट ने भूपेश बघेल के साथ बैठक की थी। इस दौरान चन्नी समर्थकों ने हाईकमान के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।
  • राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया जाए।
  • चरणजीत सिंह चन्नी को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए।
  • उम्मीदवारों के चयन में चन्नी की राय को प्राथमिकता दी जाए।
  • बैठक से पहले चन्नी ने भी अपने सख्त तेवर दिखाए थे। उन्होंने कहा था, “तेल देखिए और तेल की धार देखिए।” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की चुनौती

पंजाब विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मार्च 2027 तक है। चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।आम आदमी पार्टी अपनी सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी भी पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने अंदरूनी मतभेदों को खत्म कर एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने की है।

हाईकमान के फैसले पर टिकी नजर

पंजाब कांग्रेस में चन्नी और वड़िंग गुट के बीच चल रही खींचतान को लेकर अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर है। पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को मजबूत रखने और सभी गुटों को साथ लेकर चलने की बड़ी चुनौती है।अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद को किस तरह सुलझाती है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की रणनीति क्या रहती है।

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