पटना।NEET पेपर लीक मामले को लेकर बिहार की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुधवार को पटना में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 30 जुलाई को होने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में छात्रों और युवाओं का यह आक्रोश किस दल के पक्ष में जाएगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर, जिसे लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, वहां भी इस मुद्दे का असर देखने को मिल सकता है। खासकर युवा मतदाताओं के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए यह चुनाव पहले से अधिक दिलचस्प हो गया है।
बीजेपी बोली— चुनाव स्थानीय मुद्दों पर
बीजेपी नेताओं का कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव पूरी तरह स्थानीय विकास और क्षेत्रीय मुद्दों पर लड़ा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि पूर्व विधायक नितिन नवीन के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों के आधार पर जनता एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताएगी। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने कहा कि छात्र आंदोलन का चुनावी नतीजों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और बीजेपी अपनी सीट बरकरार रखेगी।
जनसुराज ने बनाया बड़ा चुनावी मुद्दा
वहीं, जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर ने NEET पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे कथित घोटालों को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि बिहार के छात्र वर्षों से पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं का सामना कर रहे हैं, जिससे युवाओं में भारी नाराजगी है।प्रशांत किशोर ने कहा कि मेहनत से परीक्षा देने वाले छात्रों को बार-बार निराशा मिल रही है, जबकि भ्रष्टाचार के कारण योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार, बांकीपुर की जागरूक जनता इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है और इसका जवाब मतदान के जरिए दे सकती है।
विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाया है। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का प्रभाव केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उपचुनाव का अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदान के दिन मतदाता राष्ट्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं या स्थानीय विकास को।
युवा वोटर बन सकते हैं निर्णायक
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में शिक्षित और युवा मतदाताओं की अच्छी संख्या है। ऐसे में यदि छात्र आंदोलन की गूंज मतदान तक बनी रहती है, तो यह चुनावी समीकरण बदल सकती है। वहीं, यदि स्थानीय विकास और संगठनात्मक मजबूती हावी रही, तो बीजेपी अपनी बढ़त बरकरार रख सकती है।अब सबकी नजर 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर है, जहां यह साफ होगा कि NEET पेपर लीक का मुद्दा केवल सड़क तक सीमित रहा या उसने चुनावी नतीजों को भी प्रभावित किया।


