पटना। बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी रहे मृत्युंजय तिवारी ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। करीब एक दशक तक आरजेडी का मुखर चेहरा रहे तिवारी ने पार्टी छोड़ते हुए संगठन के भीतर की कार्यशैली और नेतृत्व के आसपास मौजूद लोगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके इस्तीफे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और उपचुनाव को लेकर सभी दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
2014 से निभा रहे थे अहम जिम्मेदारी
मृत्युंजय तिवारी को वर्ष 2014 में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी नियुक्त किया था। इसके बाद उन्होंने टीवी डिबेट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और अन्य सार्वजनिक मंचों पर लगातार पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। अपनी बेबाक शैली और प्रभावशाली वक्तृत्व के कारण वे आरजेडी के सबसे पहचान वाले प्रवक्ताओं में शामिल रहे।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
मृत्युंजय तिवारी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ। सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल का दामन थामा। पार्टी में उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई और मीडिया के सामने पार्टी की नीतियों और विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। लंबे समय तक वे लालू प्रसाद यादव और बाद में तेजस्वी यादव के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे।
इस्तीफे के पीछे क्या बताया कारण?
इस्तीफा देने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी में रहते हुए हमेशा पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन अब पार्टी में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं जो संगठन को “दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।” उनका आरोप है कि ऐसे लोगों के कारण समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं का सम्मान नहीं हो रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी चिंताओं से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पहले ही अवगत कराया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनके अनुसार, ऐसे माहौल में पार्टी में बने रहना उचित नहीं था, इसलिए उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया।
लालू यादव का जताया आभार
इस्तीफे के दौरान मृत्युंजय तिवारी ने लालू प्रसाद यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उन्हें पार्टी का प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी बनाने का अवसर दिया गया, जिसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया।
RJD के लिए क्यों माना जा रहा बड़ा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा केवल एक नेता का पार्टी छोड़ना नहीं है, बल्कि यह आरजेडी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वे लंबे समय तक पार्टी का प्रमुख मीडिया चेहरा रहे और हर बड़े राजनीतिक मुद्दे पर आरजेडी का पक्ष मजबूती से रखते रहे। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव से पहले उनका जाना पार्टी के लिए रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है।
बीजेपी में शामिल होने की अटकलें
मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी ओर, आरजेडी की ओर से भी उनके इस्तीफे को लेकर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा?
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव और उपचुनावों से पहले नेताओं के दल बदलने का दौर तेज होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि मृत्युंजय तिवारी अपनी अगली राजनीतिक पारी किस दल के साथ शुरू करते हैं। यदि वे किसी नए दल में शामिल होते हैं, तो इसका असर बिहार की राजनीतिक रणनीति और चुनावी समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।


