नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के विरोध प्रदर्शन ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। मंगलवार देर रात शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे आंदोलन स्थल पर पहुंचे और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मंच साझा करते हुए प्रदर्शनकारी युवाओं का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश के युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “मैं यहां भाषण देने नहीं, बल्कि युवा शक्ति के सामने सिर झुकाने आया हूं। यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि देश के भविष्य की आवाज़ है। यह चिंगारी अब बुझने वाली नहीं है।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह से उसे दबाने का प्रयास उचित नहीं है।उद्धव ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश का युवा अपने अधिकारों और भविष्य के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि केवल किसी एक मंत्री को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ऐसी नीतियों और व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, जिनके कारण युवाओं में असंतोष पैदा हुआ है।
अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का भी जिक्र किया और कहा कि भारत की आज़ादी लाखों लोगों के बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज़ है और यदि युवा अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे हैं, तो सरकार को उसे गंभीरता से सुनना चाहिए।उद्धव ठाकरे ने आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि “महाराष्ट्र हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़ाई में आगे रहा है और इस आंदोलन में भी पूरा महाराष्ट्र आपके साथ खड़ा है। यह किसी एक राज्य या संगठन की लड़ाई नहीं, बल्कि देश के युवाओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है।”
विपक्ष का प्रधानमंत्री आवास तक मार्च
इससे पहले मंगलवार को विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद भवन से प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला और वहां धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के नेताओं से बातचीत कर धरना समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और देर रात सभी नेताओं को रिहा कर दिया।
आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन
जंतर-मंतर पर जारी CJP आंदोलन को लगातार विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और कई सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन मिल रहा है। उद्धव ठाकरे के पहुंचने के बाद आंदोलन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और तेज हो सकता है।


