Wednesday, August 26, 2026

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पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल, कलह सुलझाने मैदान में उतरे भूपेश बघेल बाजवा बोले ‘ट्रंप और ईरान बात कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं’

चंडीगढ़। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। संगठन में बढ़ते मतभेदों को खत्म करने और नेताओं के बीच तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा है। उनके दौरे को पार्टी में जारी गुटबाजी समाप्त करने की अहम कोशिश माना जा रहा है।

चंडीगढ़ पहुंचते ही भूपेश बघेल ने वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग दौर की बैठकों का सिलसिला शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से मुलाकात की और संगठन में चल रहे विवादों पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने अन्य नेताओं से भी अनौपचारिक बैठकें कर उनकी राय और शिकायतें सुनीं। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी तैयारियों से पहले सभी नेताओं को एक मंच पर लाकर संगठन को मजबूत किया जाए।

बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने बातचीत और आपसी समन्वय पर जोर देते हुए कहा, “अगर ट्रंप और ईरान बातचीत कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?” उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें संवाद के जरिए सुलझाया जा सकता है। बाजवा ने भरोसा जताया कि सभी नेता मिलकर पार्टी हित में काम करेंगे और चुनाव से पहले संगठन पूरी तरह एकजुट होकर जनता के बीच जाएगा।

दरअसल, हाल ही में कांग्रेस द्वारा घोषित नई संगठनात्मक समितियों को लेकर कई नेताओं ने नाराजगी जाहिर की थी। कुछ नेताओं का कहना है कि नियुक्तियों में संतुलन नहीं रखा गया, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। इसी असंतोष को दूर करने के लिए भूपेश बघेल व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुन रहे हैं और समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि पार्टी के भीतर मतभेद अभी पूरी तरह खत्म होते नहीं दिख रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने अलग बैठक कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने हालिया संगठनात्मक फैसलों पर पुनर्विचार की मांग भी पार्टी नेतृत्व के सामने रखी है। इससे साफ है कि कांग्रेस के सामने चुनाव से पहले संगठनात्मक एकता बनाए रखना आसान नहीं होगा।

इस बीच, कांग्रेस की नवगठित अनुशासन समिति ने पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर, जिन्हें चन्नी का करीबी माना जाता है, को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसे पार्टी अनुशासन को लेकर हाईकमान के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि संगठनात्मक अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा।

वहीं, सतलुज फिल्म विवाद पर भी प्रताप सिंह बाजवा ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। बाजवा ने कहा कि जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के बजाय राजनीतिक दलों को राज्य के विकास और लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से मुकाबला करने से पहले अपनी अंदरूनी गुटबाजी खत्म करना है। यदि पार्टी समय रहते सभी नेताओं को साथ लाने में सफल होती है, तो चुनावी मैदान में उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है। ऐसे में भूपेश बघेल का यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस की चुनावी रणनीति और एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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