नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। वांगचुक के आंदोलन को लेकर कई विपक्षी दलों ने समर्थन जताया है, लेकिन कांग्रेस ने अब तक इससे दूरी बनाए रखी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि आखिर कांग्रेस इस आंदोलन में खुलकर शामिल क्यों नहीं हो रही है।सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को कई दिन बीत चुके हैं और उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और वाम दलों के नेताओं ने आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है।
राहुल गांधी के जंतर-मंतर नहीं पहुंचने पर उठे सवाल
विपक्ष के कई नेता सोनम वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी अभी तक वहां नहीं पहुंचे हैं। इसे लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि कांग्रेस की ओर से पार्टी नेताओं ने वांगचुक के मुद्दों पर समर्थन जताया है।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोनम वांगचुक को पत्र लिखकर उनकी चिंताओं के प्रति समर्थन जताया और उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। वहीं कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा कि पार्टी वांगचुक की चिंताओं को समझती है और केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध जारी रखेगी।
अन्ना आंदोलन का अनुभव कांग्रेस को कर रहा सतर्क
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस मामले में बेहद सावधानी से कदम उठा रही है। पार्टी को वर्ष 2011 के अन्ना हजारे जनलोकपाल आंदोलन की याद है, जिसने तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया था और बाद में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिला था।
कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि किसी भी बड़े जन आंदोलन से जुड़ने से पहले पार्टी को उसके राजनीतिक प्रभाव और संभावित परिणामों का आकलन करना जरूरी है। पार्टी को आशंका है कि यदि वह इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होती है तो इसका राजनीतिक लाभ किसी अन्य दल को मिल सकता है।
कांग्रेस नेताओं में आंदोलन की भूमिका को लेकर मतभेद
कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है, इसलिए उन्हें आंदोलन से जुड़ना चाहिए।वहीं कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन राजनीतिक रूप से आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ दिखाई देता है और कांग्रेस को इसमें सीधे तौर पर शामिल होने से बचना चाहिए। उनका तर्क है कि पार्टी को अपने स्वतंत्र राजनीतिक एजेंडे के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
सोनम वांगचुक के रुख को लेकर भी उठे सवाल
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सोनम वांगचुक के पुराने बयानों और राजनीतिक रुख का हवाला देते हुए कहा है कि उन्होंने समय-समय पर अलग-अलग मुद्दों पर सरकार की प्रशंसा भी की है। इसी कारण पार्टी नेतृत्व इस आंदोलन को लेकर पूरी तरह सक्रिय होने से पहले स्थिति को समझना चाहता है।हालांकि आंदोलन समर्थकों का कहना है कि मुद्दा किसी व्यक्ति या दल का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों से जुड़ा है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अन्ना हजारे आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की थी।पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार सोनम वांगचुक की मांगों और स्वास्थ्य को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद करना चाहिए और उनकी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए।
आगे की रणनीति पर नजर
सोनम वांगचुक का आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। विपक्षी दल जहां इसे सरकार के खिलाफ मुद्दा बना रहे हैं, वहीं कांग्रेस इस मामले में संतुलित रुख अपनाती नजर आ रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में राहुल गांधी या कांग्रेस नेतृत्व इस आंदोलन को लेकर कोई बड़ा कदम उठाते हैं या पार्टी अपनी मौजूदा रणनीति पर कायम रहती है।


