अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सिंधी समाज और कुछ जौहरियों ने मंदिर ट्रस्ट को दिए गए कीमती दान की रसीद और उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग की है।
200 किलो चांदी की ईंटों को लेकर सवाल
कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राजू वी. मनवानी ने आरोप लगाया है कि 26 जनवरी 2021 को सिंधी समुदाय की ओर से 200 किलो चांदी की ईंटें (प्रत्येक 1 किलो) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अयोध्या में सौंपी गई थीं।
उनका कहना है कि उस समय दान की कोई रसीद नहीं दी गई और उन्हें केवल यह आश्वासन दिया गया था कि चांदी के उपयोग का निर्णय बाद में किया जाएगा। अब उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या यह चांदी मंदिर निर्माण में ही उपयोग हुई या कहीं और गई।
कीमत में बड़ा अंतर, दानदाता चिंतित
मनवानी के अनुसार, जिस समय यह दान दिया गया था, उस समय चांदी की कीमत लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये थी, जबकि वर्तमान में इसकी अनुमानित कीमत 6 से 7 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि दानदाताओं को अपने योगदान की जानकारी और उपयोग के बारे में पूछने का अधिकार है।
जांच और कार्रवाई की मांग
उन्होंने यह भी कहा कि यदि दान का उपयोग मंदिर कार्य के लिए नहीं हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने एसआईटी जांच की मांग का भी उल्लेख किया।
जौहरी का अलग दावा भी सामने आया
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में लखनऊ के एक जौहरी ने दावा किया है कि उन्हें भी मंदिर को दान में दिए गए लगभग 3 किलोग्राम चांदी के दीपक और अन्य वस्तुओं की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है।
इसके अलावा, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के उत्तर भारत प्रमुख ने यह भी कहा है कि भूमिपूजन से पहले दान किए गए लगभग 39.26 किलोग्राम चांदी के सामान का भी कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ट्रस्ट से पारदर्शिता की उम्मीद
इन आरोपों और सवालों के बीच दानदाताओं ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील की है कि सभी चढ़ावों और दानों के उपयोग की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के भ्रम या विवाद से बचा जा सके।


