नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है। चिदंबरम की इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है।
इसी कड़ी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए उन्हें सिर्फ ‘दिमागी नक्सल’ नहीं, बल्कि ‘प्योर नक्सल’ तक बता दिया। सरमा ने चिदंबरम के केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर कार्यकाल को भी सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए उनके कार्यकाल की जांच की मांग उठाई।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में सशस्त्र नक्सलवाद में कमी का जिक्र करते हुए वैचारिक रूप से नक्सली सोच रखने वाले लोगों को लेकर भी चिंता जताई थी। प्रधानमंत्री ने ऐसे तत्वों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही थी।
प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है। उनके इस बयान ने भाजपा नेताओं को कांग्रेस पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया। भाजपा ने चिदंबरम की टिप्पणी को नक्सलवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़ते हुए कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।
वहीं, हिमंत बिस्वा सरमा ने चिदंबरम के गृह मंत्री रहते नक्सलवाद से निपटने की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि चिदंबरम स्वयं को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं तो उनके गृह मंत्री के कार्यकाल के दौरान वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों की भी समीक्षा होनी चाहिए।
सरमा ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में बने शांतिपूर्ण माहौल से असहज है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को अस्थिर करना चाहती है।
दिमागी नक्सल’ से शुरू हुआ यह विवाद अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच जारी बयानबाजी ने नक्सलवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक विचारधारा को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।


