Tuesday, August 25, 2026

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बांकीपुर में भाजपा का 31 साल पुराना किला ढहा, प्रशांत किशोर ने करीब 19 हजार वोटों से दर्ज की ऐतिहासिक जीत

पटना | 3 अगस्त 2026

बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। भाजपा के लंबे समय से अभेद्य माने जाने वाले इस गढ़ को ध्वस्त करते हुए उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 18,953 मतों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ ही बांकीपुर की राजनीति में तीन दशक पुराना राजनीतिक समीकरण बदल गया है।

मतगणना के दौरान कुल 31 राउंड की काउंटिंग हुई, लेकिन एक भी चरण ऐसा नहीं आया जब भाजपा उम्मीदवार बढ़त बना सके। शुरुआत से अंत तक प्रशांत किशोर लगातार आगे रहे और अंततः निर्णायक बढ़त के साथ जीत दर्ज की।

31 साल बाद बदला बांकीपुर का राजनीतिक इतिहास

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके लिए उपचुनाव कराया गया। पिछले करीब 31 वर्षों से इस सीट पर भाजपा और सिन्हा परिवार का वर्चस्व रहा, लेकिन इस बार मतदाताओं ने बदलाव का स्पष्ट संदेश देते हुए जन सुराज के पक्ष में जनादेश दिया।

जन सुराज के लिए निर्णायक साबित हुई जीत

प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा थी। चुनावी रणनीतिकार के रूप में देशभर में पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर पहली बार स्वयं चुनाव मैदान में उतरे थे। बांकीपुर की जीत ने यह संदेश दिया कि जन सुराज अब बिहार की राजनीति में एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रही है और पारंपरिक वोट बैंक को चुनौती देने की क्षमता रखती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परिणाम ने बिहार की राजनीति में भाजपा और राजद के बीच एक प्रभावशाली तीसरे विकल्प की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।

  • चुनाव परिणाम
  • उम्मीदवार पार्टी प्राप्त मत परिणाम
  • प्रशांत किशोर जन सुराज पार्टी 63,203 विजयी
  • नीरज सिन्हा भारतीय जनता पार्टी 44,250 पराजित
  • रेखा गुप्ता राष्ट्रीय जनता दल 14,085 पराजित
  • जन सुराज कार्यकर्ताओं में जश्न

मतगणना के शुरुआती रुझानों से ही जन सुराज के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। जैसे-जैसे प्रशांत किशोर की बढ़त बढ़ती गई, पार्टी कार्यालयों और एएन कॉलेज मतगणना केंद्र के बाहर समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों, गुलाल और आतिशबाजी के साथ जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने इसे बिहार में बदलाव की राजनीति की शुरुआत बताया और प्रशांत किशोर के समर्थन में जमकर नारे लगाए।

हाई-प्रोफाइल रहा चुनावी मुकाबला

बांकीपुर उपचुनाव बिहार के सबसे चर्चित राजनीतिक मुकाबलों में शामिल रहा। भाजपा ने अपने तीन दशक पुराने गढ़ को बचाने के लिए वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा। वहीं, प्रशांत किशोर ने खुद मोर्चा संभालते हुए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, सुशासन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को चुनाव का केंद्र बनाया तथा युवाओं, महिलाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं तक सीधा संवाद स्थापित किया।

बिहार की राजनीति में नए समीकरण

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत दे दिए हैं। भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय है, जबकि जन सुराज के लिए यह जीत संगठन के विस्तार और राज्य की राजनीति में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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