नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव का मतदान गुरुवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। मतदान के बाद सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि तीनों सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है।
सबसे अधिक चर्चा बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट की रही, जहां करीब 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत कम है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। यहां कुल 26 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार के बीच माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर करीब 70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों के चयन का असर चुनाव परिणामों पर दिखाई दे सकता है।
वहीं गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। यहां केवल 37.50 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक था। यानी इस बार मतदान में करीब 22.65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। शहरी क्षेत्रों में कम मतदान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मंथन शुरू हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत घटकर 35 प्रतिशत के आसपास पहुंचना इस बात का संकेत हो सकता है कि बड़ी संख्या में सामान्य या न्यूट्रल मतदाता मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे। ऐसे में चुनाव परिणाम संगठित वोट बैंक और कोर समर्थकों की सक्रियता पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।अब सभी की नजर मतगणना पर है, जहां यह साफ होगा कि कम मतदान का फायदा किस राजनीतिक दल को मिलता है और किसे नुकसान उठाना पड़ता है।


