Monday, August 24, 2026

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सिद्धिविनायक मंदिर में कथित घोटाले की होगी जांच, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने दिए स्पेशल ऑडिट के आदेश

मुंबई: देश के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़े कदम उठाते हुए पिछले पांच वर्षों के वित्तीय लेनदेन की विशेष जांच (स्पेशल ऑडिट) के आदेश दिए हैं। इस जांच में मंदिर को मिले नकद दान, स्वर्ण आभूषण, गहनों, अन्य मूल्यवान वस्तुओं और संपत्तियों का विस्तृत ऑडिट किया जाएगा।

राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त मुख्य सचिव (IAS) असीम गुप्ता को सौंपी है। ऑडिट के दौरान मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, दान की व्यवस्था, आभूषणों के रखरखाव और संपत्ति प्रबंधन की गहन समीक्षा की जाएगी।

शिंदे से मिले मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष

मंगलवार को सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया ताकि मंदिर प्रशासन पर लगे आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।

नगर विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्पेशल ऑडिट की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या घोटाले की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राज ठाकरे के आरोपों से गरमाई राजनीति

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उनके इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

मंदिर ट्रस्ट ने दी सफाई

राज ठाकरे के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने कहा कि उनके बयान अधूरी जानकारी पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बाद जांच में पता चला था कि कुछ स्थायी और संविदा कर्मचारी दर्शन के नाम पर ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे।

सरवणकर ने बताया कि इस मामले में 19 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा बाहरी एजेंटों और स्टॉल संचालकों के हस्तक्षेप पर भी रोक लगाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर के पुजारियों को मिलने वाला दान भी निर्धारित दानपेटी में ही जमा कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

राज्य सरकार का कहना है कि विशेष ऑडिट पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर महाराष्ट्र सरकार और मंदिर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

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